नयी दिल्ली, 14 जनवरी (वार्ता) जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 61वीं शंकर ऑन-द-स्पॉट पेंटिंग (मौके पर चित्रकला) प्रतियोगिता 2026 में करीब 5000 बच्चों ने हिस्सा लेकर एक साथ विविध रंगों से अपने कल्पना के संसार को साकार किया। इसमें पांच वर्ष से 16 आयु वर्ग के बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेकर अपनी कल्पनाओं, रंगों और रचनात्मक ऊर्जा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट (सीबीटी) के संपादक (प्रकाशन) नवीन मेनन ने कहा कि यह प्रतियोगिता बच्चों को खुलकर सोचने और बिना डर अपनी कल्पना व्यक्त करने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि आज जब बच्चों का अधिकतर समय स्क्रीन और डिजिटल गैजेट्स में बीत रहा है, ऐसे आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह प्रतियोगिता बच्चों के लिए एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स साबित हुई, जिसमें वे तीन घंटे तक मोबाइल और टैबलेट से दूर रहे।
शंकर ऑन-द-स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी और तब से यह आयोजन बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को निरंतर प्रोत्साहित करता आ रहा है। प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य बच्चों को स्वतंत्र सोच, कल्पना और रंगों की दुनिया से जोड़ना है। इस वर्ष भी बच्चों ने सामाजिक विषयों, प्रकृति, सपनों और अपने आसपास की दुनिया को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया।
इस आयोजन में दिल्ली-एनसीआर की कई गैर-सरकारी संस्थाओं की भागीदारी भी रही। विद्या फाउंडेशन, आरोहण फाउंडेशन, कथा फाउंडेशन सहित कई एनजीओ ने अपने बच्चों को इस मंच तक पहुंचाया, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
इस मौके पर राधिका शंकर ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल चित्र बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि कला समय और तकनीक से परे होती है और यह बच्चों को संवेदनशील, आत्मविश्वासी और सृजनशील बनाती है।
सीबीटी के ट्रस्टी (प्रशासन) रोबिंदर सचदेव ने कहा कि डिजिटल कंटेंट के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को संतुलन सिखाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक बच्चों के जीवन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन उसका स्थान सीमित होना चाहिए ताकि बचपन की सहजता और रचनात्मकता बनी रहे।
