जबलपुर: जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने पशुपालन एवं दुग्ध विभाग भोपाल के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं को क्रमश: 5 वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष और 30 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर बकाया सहित समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान करें। इसके साथ ही एकलपीठ ने कहा कि यह लाभ उसी तिथि से लागू किया जाए जिस तिथि से दंत चिकित्सकों को यह लाभ दिया गया है।जबलपुर निवासी डॉ. विष्णु कुमार गुप्ता सहित 23 विटनरी असिस्टेंट सर्जन की ओर से अधिवक्ता मणिकांत शर्मा ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि दंत शल्य चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों को 5 वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाता है। वहीं, पशु चिकित्सा सहायक शल्य चिकित्सकों को 8 वर्ष की सेवा पूरी होने पर यह लाभ दिया जाता है। सरकार का यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पाँचवें केंद्रीय वेतन आयोग में पशु चिकित्सा अधिकारी को सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों और दंत चिकित्सा अधिकारी के साथ वेतनमान और कैरियर संभावनाओं में पूर्ण समानता प्रदान करने की सिफारिशें की थीं।
उक्त सिफारिश को छठे वेतन आयोग और सरकार द्वारा केंद्रीय सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2008 में पुन: अनुमोदित किया गया था। यह आदेश पशु चिकित्सा अधिकारियों को वेतनमान और कैरियर प्रगति के संदर्भ में समान लाभ का हकदार बनाता है। उक्त लाभ से वंचित करना मनमानाए,अनुचित और अन्यायपूर्ण माना गया तथा इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई। उक्त निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित किया गया था।
