भागीरथपुरा कांड पर सांसद लालवानी की चुप्पी क्यों…

इंदौर: शहर के भागीरथपुरा जहरीले पानी के कारण बड़ी त्रासदी हो गई. भाजपा के स्थानीय सांसद ने क्षेत्र में झांका तक नहीं. देश भर में भागीरथपुरा त्रासदी की चर्चा हो रही है और सांसद का घटना को लेकर असंवेदनशील रवैए अपनाना, जनता को खल रहा है. चर्चा इस बात की भी हो रही है कि क्या भागीरथपुरा से बीजेपी और सांसद को वोट नहीं मिले? जो सांसद क्षेत्र में घटना के 15 दिन बीतने के बाद भी पीड़ितों की खैर खबर लेने नहीं पहुंचे. इसका क्या कारण हो सकता है?

लगता है कि भाजपा में अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है. संगठन में बिखराव आंतरिक तौर पर शुरू हो गया है. गुटीय संतुलन बनाए रखने के बजाए बिखरता जा रहा है. इंदौर भाजपा का अभेद गढ़ माना जाता है, शहर की जनता भाजपा नेताओं पर आंख बंद करके विश्वास जताती आ रही है. आज उसी शहर की जनता के साथ सांसद का बेरुखा व्यवहार चर्चा का विषय बन चुका है!
शहर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से 20 से ज्यादा मौतें हो गई और हजारों की संख्या में लोग बीमार हो गए. इतनी बड़ी घटना के बाद स्थानीय सांसद शंकर लालवानी का एक बार भी क्षेत्र में नहीं जाना और ना ही पीड़ितों का हालचाल पूछना, जन चर्चा का विषय बन गया है. ऐसी चर्चा है कि भाजपा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आंतरिक तौर पर कमजोर करने की रणनीति चल रही है. यही कारण है कि शहर के विधायकों ने भी घटना क्षेत्र से दूरी बना रखी है.

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के सामने मुंह दिखाई कर पूरे मामले में विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अकेला कर दिया गया. दूसरी ओर बीजेपी अतिविश्वास में रही कि कांग्रेस ज्यादा कुछ नहीं कर सकेगी. भाजपा का यह दांव उल्टा पड़ गया और कांग्रेस ने घटना को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया. बताया जा रहा है कि भाजपा का एक धड़ा विजयवर्गीय के खिलाफ सक्रिय हो रहा है. उसका खामियाजा सहज सरल स्वभाव के महापौर को भी उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे विजयवर्गीय के साथ है.
आंतरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
इस सबसे अलग बात यह है कि सांसद लालवानी द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र से दूरी बनाना भाजपा की आंतरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है। आज इस हालत में लालवानी का पीड़ितों के बीच नहीं जाने से विजयवर्गीय ही नहीं, बल्कि भाजपा भी कमजोर हुई है। कांग्रेस पार्टी को उक्त घटना से स्वयं को खड़ा करने का मौका जरूर मिल गया और मुद्दा हाथ में आने से भाजपा पूरी तरह से रक्षात्मक मुद्रा में है।

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