वाकणकर की विरासत को नया आयाम: राष्ट्रीय संगोष्ठी में सम्मान, शोध और संरक्षण पर केंद्रित रहा आयोजन

भोपाल: डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ विरासत, शोध और संरक्षण के व्यापक विमर्श के साथ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन में देश भर से आए पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के विशेषज्ञों ने भारतीय विरासत के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन पर मंथन शुरू किया।
कार्यक्रम के दौरान 19वां डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल को प्रदान किया गया।

उन्हें यह सम्मान शैल-चित्र अध्ययन और पुरातत्व के क्षेत्र में दशकों के योगदान के लिए दिया गया। डॉ. मठपाल अब तक पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं और शैल चित्र स्थलों की खोज कर चुके हैं, जिससे भारत की प्रागैतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि रातापानी अभ्यारण्य का नामकरण अब विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर किया जाएगा, जिससे प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक स्मृति भी सजीव रहेगी।संगोष्ठी में पुरातत्व प्रशासन, अभिलेखागार, संग्रहालय प्रबंधन और वैज्ञानिक संरक्षण पद्धतियों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विद्वानों का मानना है कि यह आयोजन न केवल वाकणकर की विरासत को सम्मान देता है, बल्कि भारत के ज्ञान परिदृश्य में मध्यप्रदेश की भूमिका को भी सशक्त करता है।

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