
भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनीष शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का आरोप है कि शहर में संचालित फर्जी अस्पतालों, अयोग्य स्टाफ और नियमविरुद्ध चल रहे मेडिकल संस्थानों को संरक्षण दिया जा रहा है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि अनियमितताओं की शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई के बजाय उन्हें उजागर करने वालों को डराने का प्रयास किया जा रहा है।
रवि परमार ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से निजी अस्पतालों, नर्सिंग कॉलेजों और पैथोलॉजी लैब्स में हो रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायतें करते आ रहे हैं, जिनके साथ दस्तावेजी साक्ष्य भी लगाए गए। इसके बावजूद न तो निरीक्षण दल भेजे गए और न ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या पंजीयन निरस्तीकरण किया गया।
जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने दावा किया कि 5 दिसंबर 2025 को एनएसयूआई ने अधिकारियों द्वारा तैयार की गई कथित फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट की जानकारी सीएमएचओ को दी थी। 12 दिसंबर को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद 25 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एनएसयूआई ने अधिकारियों पर धमकी और अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया है, जो सीसीटीवी कैमरों में कैद बताया जा रहा है। संगठन ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने, दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि न्याय न मिलने पर आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
