वाशिंगटन | 08 जनवरी, 2026: अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) अधिकारी द्वारा एक महिला, रैनी गुड, की गोली मारकर हत्या के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है। फेडरल अधिकारियों का दावा है कि महिला ने अधिकारी को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की थी, लेकिन शहर के मेयर जैकब फ्रे ने इस कार्रवाई को ‘लापरवाही और गैर-जरूरी’ करार दिया है। मेयर ने सख्त लहजे में कहा कि इमिग्रेशन एजेंट शहर में अराजकता फैला रहे हैं और उन्हें तुरंत राज्य छोड़ देना चाहिए। इस घटना के बाद हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और ‘ICE को बाहर करो’ के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस संवेदनशील मामले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर वीडियो का हवाला देते हुए घटना के लिए मृत महिला को ही जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों के काम में बाधा डाल रही थी और उसने जानबूझकर अधिकारी की जान लेने की कोशिश की, जिसके जवाब में अधिकारी ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। ट्रंप के इस रुख ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और भड़का दिया है। लोग इसे ट्रंप प्रशासन की तानाशाही और प्रवासियों के खिलाफ नफरत की राजनीति के रूप में देख रहे हैं, जिससे सरकार के प्रति अविश्वास गहरा गया है।
रैनी गुड की मौत की गूंज अब केवल मिनेसोटा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पूरे अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे प्रमुख शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर अमेरिकी झंडे जला रहे हैं और ट्रंप प्रशासन के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप एक ओर ईरान जैसे देशों में मानवाधिकारों की बात करते हैं, वहीं अपने ही देश में निर्दोष नागरिकों की हत्या का समर्थन कर रहे हैं। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि कई शहरों में सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है।

