इंदौर: खुद को कभी टेलीकॉम अधिकारी, कभी थाने की इंस्पेक्टर और फिर सीबीआई अफसर बताकर साइबर ठगों ने 61 वर्षीय महिला को मनी लॉन्डि्रंग केस में फंसाने का डर दिखाया और पांच दिन में उससे 17 लाख रुपए ठग लिए. बदनामी और गिरफ्तारी के डर से महिला लंबे समय तक पुलिस के पास नहीं पहुंची. अब परिजनों की समझाइश के बाद क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कराया है.
महिला के मोबाइल पर तीन अलग अलग नंबरों से कॉल आए. पहले कॉल करने वाले ने खुद को ब्रजेश कुमार बताते हुए टेलीकॉम कंपनी का अधिकारी होने का दावा किया. उसने कहा कि महिला के नाम से एक और सिम जारी हुई है, जिससे संदिग्ध लेन देन किया जा रहा है. महिला ने जब इससे इनकार किया तो आरोपी ने बताया कि कोलाबा पुलिस थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है और उसे मुंबई आना होगा.
इसके कुछ देर बाद महिला को दूसरे नंबर से वॉट्सऐप कॉल आया. कॉलर ने खुद को कोलाबा थाने की इंस्पेक्टर आरती बताया और कहा कि जिस सिम की बात हो रही है, उससे मनी लॉन्डि्रंग और तस्करी से जुड़ा पैसा बैंक खातों में जमा कराया है. आरोपी ने वारंट जारी होने की बात कहकर डराया और खाते की जांच का हवाला देकर कॉल काट दिया. कुछ ही देर में तीसरा कॉल आया. इस बार कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर दया नायक बताया.
उसने कहा कि महिला मनी लॉन्डि्रंग केस में फंस चुकी है, लेकिन जांच में सहयोग करने पर उसे बचाया जा सकता है. साथ ही परिवार को कुछ भी न बताने की हिदायत दी गई. इसके बाद महिला से बैंक खातों और संपत्तियों की जानकारी ली गई और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया. आरोपियों के झांसे में आकर महिला ने पांच बार में 17 लाख रुपए उनके बताए अलग अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए.
ठगों ने भरोसा दिलाया कि 48 से 72 घंटे में पूरी राशि वापस मिल जाएगी. जब तय समय बीतने के बाद महिला ने संबंधित मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो सभी नंबर बंद मिले. राशि वापस न मिलने और बदनामी के डर से महिला ने काफी समय तक यह बात किसी को नहीं बताई. बाद में परिजनों ने जब बैंक खातों की जानकारी ली तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. इसके बाद परिजनों की समझाइश पर महिला मंगलवार को क्राइम ब्रांच पहुंची और प्रकरण दर्ज कराया.
साइबर हेल्पाइन या थाने में संपर्क करें
मामले में एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि महिला के पास तीन अलग अलग नंबरों से कॉल आए थे और ठगों ने रकम अलग अलग खातों में ट्रांसफर कराई है. उन्होंने कहा कि पुलिस पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती और न ही पुलिस या कोई जांच एजेंसी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है. ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत करना चाहिए
