नई दिल्ली | 07 जनवरी, 2026: उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूस और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। रूस ने वेनेजुएला से तेल ले जा रहे एक विवादित टैंकर ‘मैरिनेरा’ (पुराना नाम बेला-1) की सुरक्षा के लिए अपनी परमाणु पनडुब्बी और नौसैनिक बेड़े को तैनात कर दिया है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड इस टैंकर को जब्त करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रूसी हस्तक्षेप के बाद अब दोनों महाशक्तियां आमने-सामने आ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के तेल व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूस की यह सक्रियता सीधे तौर पर वाशिंगटन को चुनौती मानी जा रही है।
यह पूरा विवाद ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़ा है, जो पुराने और अज्ञात मालिकाना हक वाले जहाजों का एक नेटवर्क है। ये जहाज अक्सर अपना ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद करके ईरान, रूस और वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल का गुप्त परिवहन करते हैं। टैंकर बेला-1 ने अमेरिकी कार्रवाई से बचने के लिए बीच समुद्र में अपना नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर लिया और रूसी झंडा लगा लिया। अमेरिका का आरोप है कि रूस इन जहाजों का उपयोग अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कर रहा है, जबकि रूस इसे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अपने संप्रभु अधिकारों का हिस्सा बता रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में रूसी झंडे वाले जहाज पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई एक बड़े युद्ध को जन्म दे सकती है। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने जहाजों को एस्कॉर्ट देना जारी रखेगा, जिससे समुद्र में रणनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। अगर अमेरिकी बल जबरन जहाज पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, तो रूसी पनडुब्बियों की मौजूदगी इसे गंभीर संघर्ष में बदल सकती है। फिलहाल दोनों सेनाएं एक-दूसरे की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं, जिससे वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

