नई दिल्ली | 07 जनवरी, 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी केंद्रीय बजट 2026 से मध्यम वर्ग को होम लोन राहत की बड़ी उम्मीदें हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों और करदाताओं की पुरजोर मांग है कि आयकर की धारा 24(b) के तहत मिलने वाली ब्याज छूट की सीमा को वर्तमान 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए। पिछले कुछ वर्षों में संपत्तियों की कीमतों में हुई भारी वृद्धि और होम लोन की बढ़ती ईएमआई (EMI) के बोझ को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक माना जा रहा है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो इससे न केवल मध्यम वर्ग की बचत बढ़ेगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश को भी जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा।
वर्तमान में होम लोन के मूलधन (Principal) पुनर्भुगतान पर मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट धारा 80C के अंतर्गत आती है, जिसमें जीवन बीमा और पीपीएफ जैसे कई अन्य निवेश भी शामिल हैं। घर खरीदारों की मांग है कि होम लोन के मूलधन के लिए या तो एक अलग सेक्शन बनाया जाए या फिर धारा 80C की कुल सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाए। इससे पहली बार घर खरीदने वालों को अन्य जरूरी बचत योजनाओं से समझौता किए बिना पूरी टैक्स राहत मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से ‘किफायती आवास’ (Affordable Housing) के सपने को हकीकत में बदलने में मदद मिलेगी।
बजट 2026 में यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए इसमें होम लोन ब्याज कटौती का लाभ शामिल कर सकती है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के तहत वित्तीय सहायता और सब्सिडी के दायरे को बढ़ाने पर भी मंथन चल रहा है। पहली बार घर खरीदने वालों के लिए विशेष टैक्स बेनेफिट्स फिर से शुरू करने की चर्चा जोरों पर है, जिससे शहरी क्षेत्रों में आवास की मांग में तेजी आने और निर्माण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

