
इंदौर. भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में फैली बीमारी से हुई मौतों के मामले में आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा. लंबे समय से आंकड़ों को लेकर चल रही असमंजस और सवालों के बीच प्रशासन ने 17 मौतों को स्वीकार करते हुए मृतकों के परिजनों को दो दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शुरू कर दिया. मंगलवार को कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने घर घर पहुंचकर चेक वितरित किए.
अब प्रशासन ने भी यह मान लिया है कि इन 17 लोगों की मौत हालिया बीमारी और दूषित पेयजल से जुड़ी हुई है. मृतकों में बुजुर्गों के साथ महिलाएं और एक कम उम्र का बच्चा भी शामिल है. अधिकांश मामलों में उल्टी दस्त, तेज संक्रमण और अचानक तबीयत बिगड़ने के लक्षण सामने आए थे. हालत गंभीर होने पर इन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के बावजूद जान नहीं बच सकी.
प्रशासन का कहना है कि जैसे जैसे जांच रिपोर्ट सामने आती गई, वैसे वैसे मृतकों के नाम सूची में जोड़े गए और चेक तैयार किए गए. मंगलवार को तक सभी 17 मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता सौंप दी गई. क्षेत्रवासियों ने इसे राहत के तौर पर जरूर देखा, लेकिन यह सवाल भी उठा कि जिन मौतों को लेकर पहले असमंजस बना रहा, उन्हें स्वीकार करने में इतना वक्त क्यों लगा. कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों की जांच कराई गई है और जिन जिन मामलों में बीमारी और दूषित पानी से मौत की पुष्टि हुई, उनके परिजनों को सहायता दी गई. प्रशासन की टीमें इलाके में तैनात हैं और हालात पर नजर रखी जा रही है.
इधर, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, पानी की टंकियों की सफाई, क्लोरीनेशन और दवा वितरण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हालात और न बिगड़ें.
इन मृतकों के परिजनों को मिला दो दो लाख का चेक…
उर्मिला पति अलगू राम, मंजुला पति दिगंबर बाघे, सीमा पति गौरीशंकर, अव्यान पिता सुनील साहू, तारारानी कोरी, नंदलाल सिद्धार्थ पाल, उमा बिहारीलाल कोरी, संतोष पिता कल्याण, सुमित्रादेवी पति रामेश्वर दास, गोमती पति गोपाल, अशोक पिता मोतीलाल, रामकली पति जगदीश, शंकरलाल जीवनलाल बरेडे, श्रवण पिता नाथू और गीताबाई ध्रुवकर को चेक वितरित किए गए हैं.
