इंदौर: जिले में 3 और 4 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय एशियन वॉटरबर्ड सर्वे 2026 में यह सामने आया है कि शहर और आसपास के 19 तालाब, झीलें और जलाशय अब भी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास बने हुए हैं, हालांकि कुछ जल स्रोतों पर बढ़ता मानवीय दबाव और जल गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है. यह सर्वे केवल पक्षियों की गिनती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान तालाबों की पारिस्थितिकी, पानी की उपलब्धता, वनस्पति और मानव हस्तक्षेप का भी वैज्ञानिक आकलन किया गया.
वन मंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष इंदौर वन मंडल अंतर्गत सिरपुर झील, बिलावली तालाब, तलावली चांदा, काला कुंड, माचल जलाशय, यशवंत सागर, लेक व्यू (महू) के साथ-साथ मानपुर, चोरल और देपालपुर क्षेत्र के ग्रामीण व वन सीमा से जुड़े तालाबों बनेड़िया, बेला तालाब, बेरचा तालाब, मांगली तालाब, चोरल डैम, मांडवदेव, बड़गोंदा नखेरी डैम, भुरनखेड़ी और नाहर खाड़ी में सर्वे किया.
सर्वे में जलपक्षियों की ये प्रजातियां हुईं दर्ज
सर्वे के दौरान गर्गेनी, नॉर्दर्न शोवलर, रुडी शेलडक, एशियन ओपनबिल, सारस, ग्रेट कॉर्मोरेंट, रिवर टर्न, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, रेड वॉटल्ड लैपविंग, पाइड किंगफिशर, व्हाइट थ्रोटेड किंगफिशर, पर्पल हेरॉन, रोजी स्टार्लिंग और पाइड स्टार्लिंग सहित स्थानीय व प्रवासी जलपक्षियों की अनेक प्रजातियां दर्ज की गईं. मांगली तालाब, मांडवदेव और नखेरी डैम जैसे जलस्रोतों पर पक्षियों की अच्छी संख्या यह संकेत देती है कि जहां पानी, वनस्पति और मानवीय गतिविधियों में संतुलन है, वहां पक्षी टिके हुए हैं. सर्वे में यह भी स्पष्ट हुआ कि तालाब का आकार नहीं, बल्कि उसकी पर्यावरणीय गुणवत्ता पक्षियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है.
इन जलाशयों की स्थिति का किया गया मूल्यांकन
पक्षी गणना के साथ-साथ जलाशयों की स्थिति का मूल्यांकन करने पर यशवंत सागर और चोरल क्षेत्र की स्थिति संतोषजनक पाई गई, जबकि सिरपुर झील में खुले पानी की कमी, जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव, पानी की गुणवत्ता में गिरावट और बढ़ता मानव दबाव दर्ज किया. कुछ स्थानों पर अतिक्रमण, मछली पकड़ने के जाल और पक्षियों के विश्राम स्थलों में बाधा भी देखी गई. इस सर्वे में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ 50 से अधिक प्रशिक्षित पक्षी प्रेमियों और स्वयंसेवकों ने भाग लिया. सभी पक्षियों का डेटा ई बर्ड ऐप पर दर्ज किया गया, जबकि तालाबों की स्थिति से जुड़ी जानकारी अलग प्रारूप में संकलित की गई, जिससे यह डेटा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग योग्य बन सके.
सर्वे की विस्तृत प्रिंट और डिजिटल रिपोर्ट तैयार की जा रही वन मंडलाधिकारी के अनुसार सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि इंदौर के तालाब अब भी जीवित पारिस्थितिकी तंत्र हैं, लेकिन इनके संरक्षण के लिए निरंतर निगरानी, शहरी योजना में तालाबों को प्राथमिकता, सिरपुर जैसे प्रभावित जलस्रोतों में सुधार कार्य और छात्रों व स्थानीय नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है. एशियन वॉटरबर्ड सर्वे 2026 के आधार पर इंदौर जिले की विस्तृत प्रिंट और डिजिटल रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें पक्षियों का संपूर्ण डेटा, तालाबों की स्थिति, नक्शे और फोटोग्राफ शामिल होंगे.
वन विभाग की गणना में दिखा सुरखाब एशियन वॉटरबर्ड सर्वे 2026 के दौरान वन विभाग की गणना में इंदौर जिले के कुछ जलाशयों में सुरखाब पक्षी की मौजूदगी भी दर्ज की गई. यह सर्दियों में आने वाला प्रवासी जलपक्षी है. सुरखाब का वैज्ञानिक नाम टैडोर्ना फेरुजिनिया है, जिसे अंग्रेजी में रडी शेलडक और हिंदी में सुरखाब कहा जाता है. यह आमतौर पर साफ पानी, खुले तालाब और शांत जलाशयों में पाया जाता है. सर्वे के अनुसार जहां इसका दिखना दर्ज हुआ, वहां जलस्रोतों की पारिस्थितिकी अपेक्षाकृत संतुलित पाई गई
