इंदौर जैसी त्रासदी की आहट : रायपुर में नलों से गंदा पानी, जिम्मेदार मौन

रायपुर, 04 जनवरी (वार्ता) मध्य प्रदेश की राजधानी रायपुर के नगर निगम पर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद भी सबक नहीं लेने का आरोप लग रहा है। राजधानी के कचना हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में नलों से बदबूदार और दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में गंभीर स्वास्थ्य संकट की आशंका गहराती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पिछले एक महीने से लगातार बनी हुई है लेकिन नगर निगम के अधिकारी और जिम्मेदार इंजीनियर शिकायतों के बावजूद मौन साधे हुए हैं।

क्षेत्र में सीवरेज ड्रेनेज सिस्टम की जर्जर स्थिति इस गंभीर समस्या की मुख्य वजह बतायी जा रही है। सफाई ठेकेदारों की लापरवाही के चलते नालियां और चेंबर जाम हैं। कई स्थानों पर ड्रेनेज चेंबर खुले पड़े हैं, जिनमें गंदगी भरी हुई है। इन्हीं खुले चेंबरों के बीच से पेयजल पाइपलाइन गुजर रही है, जिससे सीवरेज का गंदा पानी पाइपलाइन में मिलकर घरों तक पहुंचने की आशंका जतायी जा रही है।

दूषित पानी के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैली हुई है। लोग इस डर में जी रहे हैं कि कहीं इंदौर जैसी भयावह स्वास्थ्य घटना रायपुर में भी न घट जाए। एक स्थानीय निवासी सुलेखा ने खास बातचीत में कहा, “यह समस्या पिछले एक महीने से जस की तस बनी हुई है। चुनाव के समय नेता और अधिकारी ध्यान देते हैं। उसके बाद सब भूल जाते हैं। हमने लगातार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नलों से गंदा पानी आ रहा है और सीवरेज गटर के ढक्कन खुले हुए हैं। आए दिन हादसे होते हैं। कभी कोई पशु गिर जाता है, तो कभी राहगीर। अधिकारी आते हैं, देखते हैं और चले जाते हैं, लेकिन काम कुछ नहीं होता।”

मामले को लेकर वार्ड पार्षद एवं भाजपा नेता गोपेश साहू से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। जब नगर निगम के जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा से इसके संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “वहां सफाई का काम चल रहा है, मेरे उच्च अधिकारी (स्थिति को) देख रहे हैं।”

इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी का नंबर देने की बात कहकर फोन काट दिया। समाचार लिखे जाने तक किसी भी सक्षम अधिकारी का संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया।

इस बीच, शहर की महापौर मिनल चौबे ने कहा, कि क्षेत्र की सभी समस्याएं सुलझा ली गयी हैं और अब साफ पानी की आपूर्ति हो रही है, हालांकि जमीन पर स्थानीय निवासियों से की गयी पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ। रविवार सुबह निगम के कर्मचारी मौके पर जरूर पहुंचे, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई ठोस कार्य प्रारंभ नहीं किया गया और समस्या जस की तस बनी हुई है।

इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा, “इंदौर में दूषित पानी के कारण 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। राजधानी रायपुर में भी पेयजल को लेकर जनता चिंतित है। कई जगह शिकायतें हैं कि नाली और सीवरेज के बीच से पेयजल पाइपलाइन गयी हुई है। पिछली बार भी गंदे पानी के कारण पीलिया और हैजा जैसी बीमारियां फैली थीं। सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। सभी वार्डों में नल और बोरवेल के पानी की जांच होनी चाहिए। महापौर सिर्फ बयानबाजी न करें, बल्कि वार्डों का दौरा कर जनता की समस्याएं सुनें और समाधान करें।”

स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था की व्यापक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गयी, तो रायपुर में भी इंदौर जैसी बड़ी स्वास्थ्य त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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