नयी दिल्ली, 01 सितम्बर (वार्ता) शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिष-एनसीईआरटी को भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक अद्वितीय संस्थान बताते हुए कहा है कि उसने प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ छात्रों के भविष्य को आकार दिया है।
श्री प्रधान ने सोमवार को यहां एनसीईआरटी के 65वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एनसीईआरटी ‘ज्ञान-कुंभ’ है जिसने अपनी स्थापना के बाद से शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अद्भुत योगदान दिया है। उन्होंने एनसीईआरटी से सुधारोन्मुख, तकनीक-संचालित और वैश्विक सर्वोत्तम विधियां अपनाने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने एनसीईआरटी के 65वें स्थापना दिवस पर सोमवार को यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कई पहलों का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने ओडिशा की 100 महान हस्तियों के जीवन और योगदान पर आधारित ‘उत्कल जननींकर सुजोग्य संतान’ पुस्तक का भी विमोचन किया।
श्री प्रधान ने कहा कि 2047 तक समृद्ध भारत का निर्माण तभी संभव होगा जब छात्रों को आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच और कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने एनसीईआरटी से अमृत शिक्षा में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने और ज्ञान को योग्यता में बदलने की दिशा में काम करने के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देने का आग्रह किया और विश्वास जताया कि यह संस्थान शैक्षिक सुधारों, शिक्षण और अधिगम में परिवर्तन के साथ समृद्ध भारत के स्वप्न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
