
छतरपुर। श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर मामला सामने आया। यहां एक अज्ञात व्यक्ति की मौत के बाद उसका शव करीब दो घंटे तक खुले में पड़ा रहा, लेकिन न तो एम्बुलेंस पहुंची और न ही शव वाहन की व्यवस्था हो सकी।
मौजूद लोगों के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 45 से 50 वर्ष के बीच थी। वह लंबे समय से बस स्टैंड परिसर में ही रहकर भीख मांगकर जीवन यापन करता था और रातें भी वहीं बिताता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कड़ाके की ठंड के चलते उसकी तबीयत बिगड़ी और वह जमीन पर गिर पड़ा। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन शव को अस्पताल ले जाने के लिए किसी तरह का वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। नगर पालिका से शव वाहन की मांग की गई, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं मिली। इस दौरान शव खुले में पड़ा रहा और आवारा कुत्ते आसपास मंडराते रहे।
स्थिति को देखते हुए बस स्टैंड के दुकानदारों ने मानवीय पहल करते हुए सफेद चादर मंगाकर शव को ढका। आखिरकार, एक ई-रिक्शा चालक ने बिना किसी शुल्क के शव को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर मॉर्चुरी में रखवा दिया। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
