
इंदौर: एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2026 की शुरुआत शनिवार से इंदौर जिले में हो गई है. यह सर्वे आज और कल दो दिन चलेगा, जिसमें जिले की प्रमुख आर्द्रभूमियों पर जल पक्षियों की वैज्ञानिक गणना की जाएगी.डीएफओ प्रदिप मिश्रा ने बताया कि आज और कल इंदौर जिले की 20 से अधिक झीलों, तालाबों, जलाशयों और नदी किनारे क्षेत्रों में सर्वे किया जा रहा है. आज सुबह से ही वन विभाग के कर्मचारी और प्रशिक्षित पक्षी प्रेमी तय टीमों में अपने-अपने चिन्हित वेटलैंड पर पहुंचे.
प्रत्येक टीम को अलग अलग स्थान आवंटित किए गए हैं, ताकि गिनती में दोहराव न हो और आंकड़े सटीक रहें. सर्वे के दौरान जल पक्षियों की पहचान और संख्या दर्ज की जा रही है. सभी रिकॉर्ड ईबर्ड मोबाइल ऐप पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे स्थान, समय और तारीख के साथ डेटा सुरक्षित हो सके. इसके साथ ही आर्द्रभूमि मूल्यांकन फॉर्म भी भरा जा रहा है, जिसमें पानी की स्थिति, जलकुंभी, वनस्पति, प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों से जुड़े दबावों का उल्लेख किया जा रहा है.
मिश्रा ने यह भी बताया कि जल पक्षी वेटलैंड की सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं. पक्षियों की संख्या और प्रजातियों के आधार पर पानी की गुणवत्ता और आवास की स्थिति का आकलन किया जाएगा. सिरपुर झील सहित कुछ क्षेत्रों में खुले पानी का क्षेत्र कम होने जैसे मुद्दे भी सर्वे में दर्ज किए जा रहे हैं. वन मंडलाधिकारी का कहना है कि इंदौर एशियन वाटरबर्ड सेंसस के लिए पूरी तरह तैयार है. कल दूसरे दिन भी शेष चिन्हित स्थलों पर सर्वे जारी रहेगा, जिसके बाद संकलित आंकड़ों का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
