शिवपुरी: शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में लाई गई नई बाघिन वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। बांधवगढ़ के जंगलों से ‘आवारा’ घोषित कर शिवपुरी भेजी गई यह बाघिन जंगली एकांत के बजाय इंसानी बस्तियों के शोर को पसंद कर रही है। रिहायशी इलाकों के प्रति इसका मोह और हाथियों तक से न डरने वाली इसकी ‘जिद्दी’ फितरत ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। हद तो तब हो गई जब डोगर गांव में 7 घंटे तक डेरा डालने वाली इस बाघिन के हमले को जिम्मेदार अधिकारी यह कहकर नकार रहे हैं कि ‘टाइगर सिर्फ खरोंच मारकर नहीं छोड़ता’। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
बांधवगढ़ के पनपथा परिक्षेत्र के ग्राम चिल्हारी के आसपास के रिहायशी क्षेत्र मे यह शिवपुरी लाई गई बाघिन सक्रिय थी। इस बाघिन के रिहायशी इलाके में भ्रमण करने से ग्रामीणो में दहशत का माहौल था। बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन द्वारा हाथियों की मदद से उसे कई बार जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद विभाग ने रेस्क्यू का निर्णय लिया।
बीटीआर के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उप संचालक पीके वर्मा की मौजूदगी में रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। आवश्यक चिकित्सकीय जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बाघिन को शिवपुरी के लिए रवाना किया गया, यह बाघिन जिद्दी है और यह आसानी से अपना क्षेत्र नही छोडती है।शिवपुरी के सतनवाड़ा थाना सीमा में माधव टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे डोगर गाव मे निवास करने वाले शिवलाल पाल पर हमला करने के बाद यह मादा टाइगर पूर्व की ओर खेतों में चली गई।
आदिवासी बस्ती से 200 से 300 मीटर दूरी पर टाइगर होने पर ग्रामीण महिलाएं और बच्चे छतों पर चढ़ गए। वन विभाग ने ग्रामीणों को दूर रखा। आसपास खेतों पर रात भर से मचानों पर रह रहे किसानों को सुरक्षित निकालकर गांव भेजा। फिर पटाखे फोड़कर बाधिन को भगाने का प्रयास किया। इससे बात नहीं बनी तो हाथी व जेसीबी मंगाई। बाघिन को टाइगर रिजर्व कॉरिडोर एरिया में भगा दिया। कुल मिलाकर यह मादा टाइगर 7 घंटे डोगर गांव के आसपास ही बनी रही थी।
टाइगर सिर्फ खरोंच देकर नहीं छोड़ता, सीसीएफ शर्मा
इस पूरे मामले में जब माधव टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि यह बात सही है कि उस क्षेत्र में टाइगर की मौजूदगी थी, परंतु यह बात भी उतनी ही सही है कि यह हमला प्रथम दृष्टया टाइगर का नहीं है। उनके अनुसार हमारा अनुभव है कि टाइगर कभी भी एड़ी पर हमला नहीं करता है और सिर्फ खरोच मारकर नहीं छोड़ता है। उनके अनुसार टाइगर का एक एक पंजा ही गंभीर चोट पहुंचाता है।
