इंदौर: इंदौर में हत्या की वारदातों का चेहरा तेजी से बदल रहा है. अब ये अपराध सिर्फ पेशेवर बदमाशों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि घरेलू रिश्तों, प्रेम प्रसंग और आपसी अविश्वास के बीच युवतियां, महिलाएं और पति-पत्नी भी खून के खेल में शामिल नजर आ रहे हैं. बीते एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में सात से अधिक ऐसे सनसनीखेज हत्याकांड सामने आए, जिनमें महिलाओं या युवतियों की प्रत्यक्ष भूमिका रही. वहीं करीब डेढ़ दर्जन मामलों में पतियों ने ही अपनी पत्नियों की जान ले ली. इन घटनाओं ने न सिर्फ पुलिस, बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है.
पूराने साल के लेखा जोखा से पता चला कि अधिकतर मामलों की जड़ में प्रेम प्रसंग, अवैध संबंध, घरेलू कलह और तात्कालिक गुस्सा रहा. मार्च में महालक्ष्मी नगर के एक फ्लैट में मेकअप आर्टिस्ट की गोली लगने से मौत हो या फरवरी में प्रेमी की गला घोंटकर हत्या, हर केस में करीबी रिश्ते ही सबसे खतरनाक साबित हुए. जून में मां द्वारा मासूम बच्ची को डुबोकर मार देना और बहू द्वारा सास की पत्थर से हत्या जैसे मामले पुलिस के लिए भी चौंकाने वाले रहे. अगस्त में प्रेम-प्रसंग के चलते युवक को बुलवाकर परिजनों द्वारा पीट पीटकर हत्या करना हो या पत्नी की साजिश में पति की गोली मारकर हत्या, इन मामलों ने साफ किया कि अपराध अब योजनाबद्ध और पारिवारिक दायरे में सिमटते जा रहे हैं. दूसरी ओर, पतियों द्वारा पत्नियों की हत्या के मामलों में भी खौफनाक ट्रेंड सामने आए हैं.
कहीं कैंची से हत्या कर खुदकुशी, कहीं साथ नहीं चलने पर गला रेत देना, तो कहीं पत्नी को जिंदा जलाकर खुद ट्रेन के आगे कूद जाना. दिसंबर के आखिरी दिनों में सामने आए मामलों में मामूली पैसों के विवाद से लेकर अविश्वास तक ने जान ले ली. पुलिस अफसरों का कहना है कि इन हत्याओं में भावनात्मक असंतुलन, गुस्से पर नियंत्रण की कमी और रिश्तों में बढ़ता अविश्वास सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है. अपराध विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते पारिवारिक विवादों का समाधान नहीं हुआ, तो ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है.
