इंदौर: भागीरथपुरा में हालात सामान्य नहीं हैं. जिस पानी से प्यास बुझाई जाती थी, उसी पानी को लेकर अब हर घर में डर है. नल खुलते ही लोग झिझक रहे हैं. कई परिवारों ने पानी भरना बंद कर दिया है, तो कहीं बोतलबंद और उबले पानी का सहारा लिया जा रहा है. गंदे पानी से फैली बीमारी ने पूरे इलाके की दिनचर्या बदल दी है.बीते कुछ दिनों में अचानक उल्टी दस्त, पेट दर्द और तेज कमजोरी की शिकायतें बढ़ीं. कई घरों में एक से ज्यादा सदस्य बीमार पड़े.
किसी के घर बुजुर्ग अस्पताल में हैं, तो कहीं छोटे बच्चों को ड्रिप चढ़ रही है. गलियों में रोजमर्रा की चहल पहल कम हो गई है और लोगों की बातचीत का एक ही विषय है पानी सुरक्षित है या नहीं. पूरे भागीरथपुरा में अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इलाके में घूम रही हैं. घर-घर सर्वे किए जा रहे हैं, मरीजों की जांच हो रही है और दवाइयां बांटी जा रही हैं. कई लोगों का इलाज घर पर ही किया जा रहा है, जबकि गंभीर हालत वाले मरीजों को अस्पताल भेजा जा रहा है. एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की आवाजाही से लोगों को हालात की गंभीरता का अहसास हो रहा है.
स्थानीय सीमा काले का कहना है कि पानी का रंग और गंध पहले से बदली हुई लग रही थी, लेकिन किसी ने अंदाजा नहीं लगाया था कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे. अब लोग एक दूसरे को उबला हुआ पानी पीने और बच्चों बुजुर्गों का खास ख्याल रखने की सलाह दे रहे हैं. नगर निगम की टीमें पानी की सप्लाई व्यवस्था की जांच में जुटी हैं. कुछ जगहों पर पाइप लाइन और टंकियों की सफाई का काम शुरू किया है.
पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य न हो, नल के पानी का सीधे उपयोग न करें. भागीरथपुरा में फिलहाल चिंता और इंतजार का माहौल है. हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि हालात जल्द सुधरें, पानी फिर से भरोसेमंद बने और इलाका बीमारी के साए से बाहर निकल सके
