नयी दिल्ली, 29 दिसंबर (वार्ता) कांग्रेस के लिए यह साल खोयी जमीन की तलाश के लिए संघर्षों भरा रहा और पार्टी को उम्मीद है कि नये साल में असम और पश्चिम बंगाल में अपनी ताकत दिखाने में सफलता मिलेगी। पार्टी के लिए बीत रहे साल में दिल्ली और बिहार में कड़ी मेहनत के बावजूद आशानुरूप सफलता नहीं मिली लेकिन वैचारिक संघर्ष में पार्टी ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ मुख्य आवाज के रूप में जोरदार प्रदर्शन किया। आम चुनाव 2024 में संविधान की रक्षा को मुख्य मुद्दा बनाकर अपनी सीट को दोगुना करने में सफल रही पार्टी ने बिहार के चुनाव में मतदाताओं के अधिकार की रक्षा का मुद्दा बनाया। पार्टी नेता राहुल गांधी ने इसके लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को एक बड़ा मुद्दा बनाया जिस पर समूचा विपक्ष उनके पीछे खड़ा दिखाई दिया। पार्टी और उसके गठबंधन को बिहार चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली लेकिन बंगाल और असम में यह मुद्दा अब भी बना हुआ है। पार्टी ने केरल में स्थानीय निकाय के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है जिससे अगले विधानसभा चुनाव में उलटफेर करने की स्थिति दिखने लगी है। विधानसभा उपचुनावों में पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा।
कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में, पहले के दो आम चुनावों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया था और लोकसभा में उसकी सीटें 54 से बढ़कर 99 पहुंच गईं लेकिन 2025 में प्रमुख राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। साल की शुरुआत में 5 फरवरी को दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के चुनाव में आम आदमी पार्टी को बाहर कर भाजपा 48 सीटें जीतकर 27 साल बाद सत्ता में लौटी लेकिन कांग्रेस को लगातार तीसरी बार पार्टी का खाता नहीं खुला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही मतदाता सूची और ईवीएम में गड़बड़ी होने का अंदेशा जता रहे हैं। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा विधानसभा के चुनाव में भारी गड़बड़ी हुई। उनका आरोप है कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग यह गड़बड़ी करवाता है। इस मुद्दे को लेकर वह अगस्त से अब तक तीन प्रेस कांफ्रेंस यहां कर चुके हैं।
उनका कहना था कि वह उदाहरण एक निर्वाचन क्षेत्र का दे रहे हैं लेकिन ऐसी गड़बड़ियां पूरे देश में हो रही हैं। उन्होंने विदेश यात्राओं में ‘वोट चोरी’ की बात शुरु कर दी है जिसको लेकर भाजपा उन पर निशाना साध रही है। अभी 23 दिसंबर को बर्लिन के हर्टी स्कूल में उन्होंने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया और कहा कि मोदी सरकार ने देश की संस्थाओं पर कब्जा कर दिया है और ईडी, सीबीआई आदि को ‘हथियार’ बनाकर काम करते हुए देश की निष्पक्ष चुनावी प्रणाली को बर्बाद कर दिया है। श्री गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद तीसरी बार गत पांच नवंबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि हरियाणा में 25 लाख फर्जी वोटर हैं। उनका दावा है कि हरियाणा में ‘एक ही घर में 501 वोटर दर्ज हैं और इनमें कई घर हैं जो सिर्फ़ कागजों पर हैं। एक महिला की तस्वीर दिखाते हुए उन्होंने दावा किया कि उसने हरियाणा के 10 बूथों पर 22 वोट डाले हैं।
कांग्रेस नेता ने इससे पहले कर्नाटक की महादेवपुरा सीट और फिर आलंद सीट में हुए वोट चोरी को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया। उनका यह भी दावा है कि वह जो भी खुलासा कर रहे हैं वह 100 फीसदी सत्य और प्रमाण पर आधारित है लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग की इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया अगर उनके पास प्रमाण हैं तो वे शपथ के साथ उसको चुनौती दें। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में पार्टी ‘वोट चोरी’ के कारण हारी है। श्री गांधी ने इससे पहले 7 अगस्त को कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वोट चोरी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इस विधानसभा क्षेत्र के कुल 6,50,000 वोटों में से 1,00,250 वोट चोरी हुए हैं।
उन्होंने 17 सितंबर को आलंद विधानसभा सीट का जिक्र किया और दावा किया “वहां भी फर्जी मतदाता बनाए गये। चुनाव आयोग ने 2023 के विधानसभा चुनाव में जिन मतदाताओं के नाम काटे और ये सभी कांग्रेस के मतदाता थे।” उनका दावा था कि कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट से 6018 वोट काट दिए और इसके लिए कर्नाटक के बाहर के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया। श्री गांधी ने बिहार में गठबंधन के साथी और राष्ट्रीय जनता-राजद नेता तेजस्वी के साथ ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राज्य के मतदाताओं को जागरूक करने को लेकर चुनाव से पहले एक पखवाड़े तक वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली। उन्होंने दावा किया यह यात्रा सफल रही लेकिन जब चुनाव का परिणाम आये तो विधानसभा की 243 सीटों में से उसके गठबंधन को महज 25 सीटें मिली और कांग्रेस की छह सीटें हैं। पार्टी ने 61 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे उसे इस बार 8.71 प्रतिशत वोट मिले जो 2020 के चुनाव के 9.6 प्रतिशत के मुकाबले कम है। तब कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उसने 19 सीटें जीती थीं। इस चुनाव से साबित हुआ है कि बिहार में कांग्रेस की जमीन बहुत कमजोर है और हर चुनाव में वह अपनी जमीन खोते जा रही है। इसी माह महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव हुए जिसमें 288 नगर परिषद तथा नगर पंचायत अध्यक्ष पदों में कांग्रेस को केवल 28 सीटें मिली।
साल के अंत में केरल में स्थानीय निकाय चुनाव में चार नगर निगम में कांग्रेस को जीत मिली है और इसका पार्टी ने जश्न मनाया है। इसी तरह से पंजाब में जिला परिषद की 25 में से 8 और ब्लॉक समितियों की 235 में से 73 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर 2025 कांग्रेस के लिए ‘खोने वाला साल’ रहा है। ‘वोट चोरी’ तथा ईवीएम को लेकर बड़ा हंगामा खड़ा करने के बावजूद उसे चुनावी बिसात पर मात ही खानी पड़ी है। कांग्रेस नेतृत्व माहौल बनाकर जनता को अपने पक्ष में करने का भरपूर प्रयास करती रही लेकिन चुनावी मैदान में उसकी लगातार हार ने उसे अब रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। पार्टी को संगठनात्मक सुधार, गठबंधन रणनीति और मजबूत नेतृत्व की जरूरत महसूस हो रही है। कांग्रेस ने इसी साल 8 तथा 9 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस अधिवेशन किया जिसमें कांग्रेस को जिला स्तर पर मजबूत बनाने के साथ ही सरदार पटेल पर विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। कांग्रेस का कहना है कि सरदार पटेल की विरासत को भाजपा ने धोखे से हड़प लिया है जबकि सरदार पटेल कांग्रेस के हैं और देश के प्रथम गृहमंत्री के रूप में उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। मई में आपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस ने भारत की सेनाओं की साहस और पराक्रम की प्रशंसा की लेकिन पार्टी ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बार बार के बयानों को लेकर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपने मित्र ट्रम्प के दबाव में आ गये। कांग्रेस ने आपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गये संसदीय शिष्टमंडल में पार्टी के प्रतिनिधित्व को लेकर जो रुख अपनाया उससे श्री शशि थरूर जैसे सांसद कांग्रेस नेतृत्व से असहमत नजर आये।
साल के अंत में कांग्रेस में संगठनात्मक मजबूती को लेकर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बयानों के बाद पार्टी के भीतर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के कई संगठन को मजबूत बनाने और जिम्मेदारियों के विकेंद्रीकरण की इन नेताओं की बातों मौन सहमति भी दे रहे हैं।
श्री शशि थरूर ने खुलकर श्री सिंह के बयान का समर्थन किया है हालांकि श्री सिंह ने कहा है कि उनके बयान का गलत अर्थ लगाया जा रहा है। कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति की 27 दिसंबर की बैठक से पहले श्री सिंह ने सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए आरएसएस और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की सराहना की थी। तस्वीर में नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा “यह बहुत ही प्रभावशाली तस्वीर है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयं सेवक और भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की ताकत को दिखाता है।”श्री सिंह ने यह तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं, श्री मोदी उनके सामने जमीन पर बैठे हैं। कांग्रेस ने 14 दिसंबर को वोट चोरी के मुद्दे पर दिल्ली में विशाल रैली की। इस रैली में भी कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा जोर शोर से उठाया।

