अयोध्या। 29 दिसंबर, 2025। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज अभिनेत्री रानी चटर्जी अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ और अयोध्या महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक चलने वाले इस त्रिदिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव में रानी अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराएंगी। एयरपोर्ट से साझा किए गए एक भावुक वीडियो में अभिनेत्री ने कहा कि नए साल की शुरुआत भगवान राम की नगरी अयोध्या से करना उनके लिए सौभाग्य और गर्व की बात है। उनके अनुसार, पवित्र नगरी के दर्शन से न केवल उनका साल सार्थक होगा, बल्कि महोत्सव का हिस्सा बनकर वह खुद को धन्य महसूस कर रही हैं।
अनोखा अंदाज: साल 2026 के लिए कोई बदलाव नहीं चाहतीं अभिनेत्री, ‘नो रेजोल्यूशन’ पॉलिसी के साथ खुद को बताया सबसे प्रिय
जहां दुनिया नए साल पर पुराने बदलाव और नए संकल्पों (रेजोल्यूशन) की तैयारी कर रही है, वहीं रानी चटर्जी ने एक बिल्कुल अलग राह चुनी है। आगामी वर्ष 2026 के संकल्प पर बात करते हुए रानी ने स्पष्ट किया कि वह अपनी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं चाहती हैं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, “मेरा साल 2025 बेहद शानदार रहा और मैं इसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए साल में प्रवेश करना चाहती हूं। मुझे किसी रेजोल्यूशन की जरूरत नहीं क्योंकि मैं खुद की सबसे बड़ी फेवरेट हूं।” रानी का यह ‘सेल्फ-लव’ वाला अंदाज सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कला की सार्वभौमिकता: भाषा की सीमाओं पर बेबाक राय, हिंदी और भोजपुरी कलाकारों के बीच भाषाई समन्वय पर दिया जोर
रानी चटर्जी ने अयोध्या दौरे के साथ-साथ कला और भाषा के अंतर्संबंधों पर भी अपनी राय खुलकर रखी। उन्होंने तर्क दिया कि एक कलाकार को कभी भी भाषाई सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। रानी ने वरिष्ठ भोजपुरी अभिनेत्री नीलम वरिष्ट के हिंदी टीवी सीरियल ‘मौनरागम’ में डेब्यू का स्वागत करते हुए कहा कि कलाकार के लिए हर भाषा एक समान माध्यम है। उनके अनुसार, कलाकार की प्रतिभा सार्वभौमिक होती है, चाहे वह भोजपुरी में काम करे या हिंदी में। रानी का मानना है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय कला मंचों के बीच का अंतर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे कला को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

