भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों का बड़ा पलायन: 8 महीनों में निकाले ₹74,822 करोड़, चीन के प्रोत्साहन पैकेज और महंगे वैल्यूएशन ने बिगाड़ा शेयर बाजार का खेल

नई दिल्ली। 29 दिसंबर, 2025। भारतीय पूंजी बाजार के लिए वर्ष 2025 का अंत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली के साथ हो रहा है। सीडीएसएल (CDSL) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस साल 26 दिसंबर तक विदेशी निवेशकों ने बाजार से शुद्ध रूप से 74,822 करोड़ रुपये की निकासी की है। चौंकाने वाली बात यह है कि साल के 12 में से 8 महीनों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे। अकेले दिसंबर महीने में 29,571 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई, जो जनवरी के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि, इक्विटी से पैसा निकालने के बावजूद विदेशी निवेशकों ने ‘डेट मार्केट’ (Debt) में रुचि दिखाई और वहां करीब 72,893 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो बाजार में बदलाव के संकेतों को दर्शाता है।

पलायन की वजह: ‘Buy China, Sell India’ की रणनीति और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भारतीय शेयरों से निवेशकों को किया दूर

विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से मोहभंग होने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी सरकार द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए दिए गए भारी ‘स्टिमुलस पैकेज’ के कारण निवेशक भारत जैसे महंगे बाजार से पैसा निकालकर चीन के सस्ते शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय शेयर बाजार का उच्च वैल्यूएशन (P/E Ratio) और अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने डॉलर को मजबूती दी है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी का बहिर्वाह तेज हुआ है। घरेलू स्तर पर कई बड़ी कंपनियों के कमजोर कॉर्पोरेट नतीजों ने भी विदेशी निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है, जिससे वे मुनाफावसूली को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बाजार का भविष्य: घरेलू निवेशकों (DII) के दम पर टिका सेंसेक्स और निफ्टी, नए साल में वैश्विक रुझानों पर रहेगी नजर

विदेशी निवेशकों की महा-बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और खुदरा निवेशकों की सक्रियता के कारण स्थिर बना हुआ है। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 0.13 प्रतिशत और निफ्टी में 0.29 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि साल के अंतिम कुछ सत्रों में बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। आगामी दिनों में वाहन बिक्री के आंकड़े, वैश्विक मुद्रास्फीति की स्थिति और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या 2026 की शुरुआत में विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजारों की ओर रुख करेंगे या बिकवाली का यह सिलसिला जारी रहेगा।

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