नई दिल्ली। 29 दिसंबर, 2025। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सराहना किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि दिग्विजय सिंह पारंपरिक रूप से संघ के कट्टर आलोचक रहे हैं, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी ने उन पुराने वाकयों को ताजा कर दिया है जब कांग्रेस के विभिन्न नेताओं ने समय-समय पर संघ की कार्यप्रणाली को सराहा है। राहुल गांधी द्वारा ‘डरने वालों को पार्टी छोड़ने’ की चेतावनी के बावजूद, पार्टी के भीतर एक ऐसा धड़ा हमेशा मौजूद रहा है जो दबे स्वर में संघ के राष्ट्रवाद और जमीनी पकड़ का कायल रहा है। दिग्विजय की सफाई के बावजूद यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के वैचारिक खेमे में संघ को लेकर विरोधाभासी विचार पनप रहे हैं।
विभिन्न राज्यों से समर्थन: ओडिशा के पूर्व स्पीकर से लेकर एमपी के विधायकों तक, अनुशासन और देशभक्ति का कर चुके हैं गुणगान
आरएसएस की तारीफ करने वाले कांग्रेस नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। ओडिशा विधानसभा के पूर्व स्पीकर किशोर पटेल ने संघ को हिंदुत्व की रक्षा और चरित्र निर्माण का प्रमुख केंद्र बताया था, वहीं मध्य प्रदेश के नेता दीपक बाबरिया ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संघ के अनुशासन से सीख लेने की सलाह दी थी। इसी क्रम में सज्जन सिंह वर्मा ने संघ के कार्यकर्ताओं की तुलना एसी कमरों में बैठने वाले कांग्रेस नेताओं से करते हुए उनकी लगन की प्रशंसा की थी। मध्य प्रदेश के ही विधायक भैरो सिंह परिहार ने तो यहाँ तक स्वीकार किया था कि वे कांग्रेस में होने के बावजूद वैचारिक रूप से संघ से जुड़े रहे हैं। ये बयान दर्शाते हैं कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भले ही हमलावर हो, लेकिन प्रादेशिक नेता संघ के प्रभाव को स्वीकार करते हैं।
दक्षिण से भी गूंज: डीके शिवकुमार का संघ गीत और राहुल गांधी की ‘निडरता’ वाली चेतावनी, आखिर क्या है कांग्रेस की मजबूरी?
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का विधानसभा में संघ का गीत गाना और विधायक एचडी रंगनाथ द्वारा उसे ‘अच्छी सीख’ बताना कांग्रेस की दोहरी वैचारिक स्थिति को उजागर करता है। इन घटनाओं पर राहुल गांधी का रुख बेहद सख्त रहा है; उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो लोग आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित हैं, उन्हें पार्टी में रहने की जरूरत नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर हिंदू मतदाताओं को साधे रखने और संघ के अनुशासित नेटवर्क का मुकाबला करने की चुनौती के कारण कांग्रेस नेता अक्सर ऐसे बयान देते हैं। फिलहाल, दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने पार्टी के सामने एक नई असहज स्थिति पैदा कर दी है, जिससे डैमेज कंट्रोल करना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

