इंदौर में चमत्कारिक सर्जरी, विदेशी बुजुर्ग महिला को नई सांस

इंदौर. डेढ़ साल से सांस लेने के लिए जूझ रही उज्बेकिस्तान की 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के लिए इंदौर उम्मीद की नई किरण बना. जटिल बीमारी और नाजुक हालत के बावजूद इंदौर के अस्पताल में हुई पांच घंटे लंबी सर्जरी ने न सिर्फ उनकी जान बचाई, बल्कि वे ठीक होकर नाचते गाते अपने देश लौट गईं.

उज्बेकिस्तान की रहने वाली 70 वर्षीय महिला लंबे समय से गंभीर सांस की बीमारी से परेशान थीं. वहां एडवांस सर्जरी की सुविधा नहीं होने के कारण हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. इसी बीच उन्हें इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल रेफर किया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर नई जिंदगी दी. इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता के मुताबिक जांच में सामने आया कि महिला के बाएं फेफड़े में तेजी से बढ़ने वाला बड़ा ट्यूमर था. ट्यूमर के कारण फेफड़े की सांस की नली पूरी तरह बंद हो चुकी थी, जिससे मरीज को गंभीर रेस्पिरेटरी दिक्कत हो रही थी. यह स्थिति बेहद नाजुक थी और तत्काल ऑपरेशन जरूरी था. मरीज की सहमति के बाद 18 दिसंबर को सर्जरी की गई. मिनिमल इन्वेसिव जीआईएल लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. संदीप राठौर के अनुसार यह ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर के साथ फेफड़े को बाहर निकालना था और फिर उसमें से ट्यूमर और खराब हिस्से को अलग कर स्वस्थ हिस्से को दोबारा सांस की नली से जोड़ना था. डॉक्टरों ने पहले ट्यूमर के साथ पूरा फेफड़ा बाहर निकाला. इसके बाद ट्यूमर और करीब 40 प्रतिशत खराब फेफड़े को अलग किया. बचे हुए 60 प्रतिशत स्वस्थ फेफड़े को फिर से ब्रोंकस से जोड़ दिया. सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग का खतरा भी ज्यादा था, क्योंकि हार्ट और फेफड़े आपस में जुड़े रहते हैं, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने सावधानी से ब्लीडिंग को नियंत्रित रखा. सर्जरी के बाद महिला की रिकवरी तेजी से होने लगी. महज छह दिन में उनकी हालत इतनी बेहतर हो गई कि उन्हें डिस्चार्ज कर दिया. अस्पताल से छुट्टी के वक्त बुजुर्ग महिला का उत्साह देखने लायक था, वे मुस्कुराते हुए नाचती-गाती अपने देश रवाना हुईं. बताया गया कि महिला को उज्बेकिस्तान के टिब्ब हेल्थ केयर एंड नेफ्रो मेडिकेयर के डायरेक्टर डॉ. फरीद खान ने इंदौर रेफर किया. लोकल को ऑर्डिनेटर परवेज खान ने मेडिकल वीजा सहित सभी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें भारत लाने में मदद की. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते यह सर्जरी नहीं होती, तो ट्यूमर तेजी से फैलकर अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता था और मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था. इस सफल ऑपरेशन ने न सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की जिंदगी बचाई, बल्कि इंदौर को एक बार फिर मेडिकल टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में साबित किया है.

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