‘एयर प्यूरीफायर पर से जीएसटी की दर कम करने के लिए वर्जुअली नहीं हो सकती है जीएसटी काउंसिल की बैठक’

नयी दिल्ली, (वार्ता) केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि एयर-प्यूरीफायर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर कम करने या खत्म करने के मुद्दे पर फैसला करने के लिए जीएसटी परिषद की बैठक सिर्फ भौतिक रूप से ही हो सकती है, वर्चुअली नहीं।

इसके साथ ही सरकार ने एयर-प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण घोषित करने वाली एक जनहित याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगा।

अवकाश कालीन पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विकास महाजन और न्यायमूर्ति विनोद कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, अपने आदेश में कहा, “जीओआई की ओर से पेश हुए सहायक सॉलीसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक अगर होनी है, तो वह सिर्फ भौतिक रूप ही संभव है, वीसी के ज़रिए नहीं। उन्होंने आगे कहा कि एक विस्तृत काउंटर हलफनामा दाखिल करने की ज़रूरत है।

यह याचिका वकील कपिल मदान ने दायर की थी, जिसमें एयर प्यूरीफायर पर से 18 प्रतिशत जीएसटी को हटाने की मांग की गयी है। याचिका में कहा गया है कि एयर प्यूरीफायर को लग्जरी नहीं बल्कि अत्यधिक वायु प्रदूषण का सामना करने के लिए एक ज़रूरत माना जाना चाहिए।

श्री मदान ने कहा कि जीओआई द्वारा विस्तृत काउंटर दाखिल किया जाए और उसके बाद एक रिजॉइंडर दाखिल किया जाए। उपरोक्त को देखते हुए, 10 दिनों के भीतर एक काउंटर हलफनामा दाखिल किया जाए। यदि कोई रिजॉइंडर हो तो वह भी दाखिल किया जाए।”
याचिकाकर्ता ने कहा कि एयर प्यूरीफायर बचाव और स्वास्थ्य सुरक्षा का काम करते हैं और उन्हें चिकित्सा उपकरण के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जिससे उन पर मौजूदा 18 प्रतिशत जीएसटी की दर को पांच प्रतिशत जीएसटी लगे। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जीएसटी की दरों से जुड़े फैसले जीएसटी परिषद की नीतियों के दायरे में आते हैं, जो केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों वाली एक संवैधानिक संस्था है। प्रतिवादियों ने बताया कि विज्ञान एवं तकनीक , पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशें, जिनमें एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने या खत्म करने का सुझाव दिया गया है, पहले से ही विचाराधीन हैं। इस दौरान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत जारी 11 फरवरी, 2020 की एक अधिसूचना का भी उल्लेख किया गया जो चिकित्सा उपकरण की परिभाषा को बढ़ाता है, जिसमें बीमारी के डायग्नोसिस, रोकथाम, निगरानी या इलाज के साथ-साथ जीवन को सपोर्ट या बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण और अप्लायंसेज शामिल हैं।

अदालत ने इस बात को दर्ज किया कि एयर प्यूरीफायर, अत्यधिक वायु प्रदूषण के समय सांस से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को कम करके, उक्त अधिसूचना के दायरे में आ सकते हैं। दलीलों और संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों पर ध्यान देते हुए पीठ ने कहा कि हालांकि वह कानूनी ढांचे और जीएसटी परिषद के कामकाज से वाकिफ है, लेकिन मौजूदा वायु प्रदूषण संकट को देखते हुए इस मुद्दे पर तुरंत विचार करने की जरूरत है।

अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले को जल्द से जल्द जीएसटी परिषद के सामने रखा जाए और इस मुद्दे पर विचार करने के लिए बैठक बुलाने की समयसीमा तय की जाए।

 

 

 

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