
शाजापुर। चाल, चरित्र और अनुशासन के मूल मंत्र की पार्टी भाजपा में कबीला संस्कृति तेजी से बढ़ती नजर आ रही है. भाजपा में गुटबाजी जो बीते तीन सालों में बढ़ी है, इतनी गुटबाजी पहले कभी नहीं थी. भाजपा की गुटबाजी को देखते हुए कांग्रेसी भी अब आश्चर्यचकित हैं. गौरतलब है कि भाजपा में बीते चार सालों में जो गुटबाजी का बीज अंकुरित हुआ था, वो अब धीरे-धीरे वट वृक्ष का रूप ले चुका है. गुटबाजी के लिए तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष हमेशा याद किए जाएंगे. उनके कार्यकाल में ही गुटबाजी का बीज अंकुरित हुआ था, जिसकी जड़े अब धीरे-धीरे पैर पसारने लगी हैं. कहा जाता है राजनीति में जो बोया जाता है, वो ही काटा जाता है. कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद भाजपा की वापसी के समय जिस प्रकार जिले में गुट विशेष की राजनीति चली, उसी का परिणाम है आज भाजपा में गुटबाजी चरम पर है. तत्कालीन जिलाध्यक्ष अम्बाराम कराड़ा के कार्यकाल में पूर्व विधायक अरुण भीमावद की राजनीति के क्षेत्र में जो अनदेखी हुई है, उसके बाद राजनीति ने ऐसी करवट बदली कि अरुण भीमावद शाजापुर के विधायक बने. जो भाजपा नेता विधानसभा चुनाव के पहले अरुण भीमावद को राजनीतिक हाशिये पर रखते थे, आज वे खुद राजनीति के हाशिये पर हैं.
भाजपा छोड़ मंत्री खेमे की ली शरण…
शाजापुर विधानसभा में जिस प्रकार भाजपा ने भाजपा हराओ अभियान चलाया था, उसी का परिणाम है कि अरुण भीमावद मामूली अंतर से चुनाव जीते थे. जो लोग भाजपा हराओ अभियान की कैम्पेनिंग कर रहे थे, वे इन दिनों राजनीतिक हाशिये पर हैं. शाजापुर की भाजपा छोडक़र वे इन दिनों मंत्री खेमे की शरण में है. एक दर्जन से अधिक भाजपा कार्यकर्ता शाजापुर भाजपा के कार्यक्रम से दूरियां बनाकर रखते थे. एक समय वो था जब कराड़ा भाजपा पॉवर में थी, तो भीमावद भाजपा हाशिये पर थी. आज राजनीति में भीमावद भाजपा पॉवर में है, तो कराड़ा भाजपा हाशिये पर है.
शुजालपुर में जिलाध्यक्ष, सांसद के नहीं लगते फोटो
शुजालपुर की राजनीति की बात करें, तो यहां भाजपा जिलाध्यक्ष रवि पांडे, सांसद महेंद्र सोलंकी के फोटो पिछले दिनों हुए कार्यक्रम में गायब थे. यही कारण है कि शाजापुर में जो कार्यक्रम होते हैं, उसमें गुट विशेष के लोग नजर नहीं आते हैं. इन दिनों भाजपा कार्यालय में अम्बाराम भाजपा समर्थित आधे से ज्यादा भाजपा नेताओं ने कार्यक्रमों से दूरियां बना रखी हैं. एक समय था जब मंच पर अम्बाराम भाजपा नजर आती थी, लेकिन इन दिनों मंच से अम्बाराम भाजपा गायब है. हालांकि इन्होंने अब शुजालपुर को अपनी राजनीतिक राजधानी बना ली है.
भाजपा में बनी ए और बी टीम…
भाजपा में इन दिनों दो टीम देखने को मिल रही है. ए और बी. ए टीम भाजपा, संगठन और सरकार की उपलब्धियां गिना रही हैं, तो बी टीम संगठन और सरकार की उपलब्धियों से दूर है. अब आने वाले समय में ए और बी टीम की दूरियां नजदीकियों में बदलती हैं या नहीं . लेकिन शाजापुर जिले में भाजपा का कबीला जगह-जगह बटा हुआ है. ए और बी टीम शाजापुर में ही नहीं, शुजालपुर और कालापीपल में भी है. जहां भाजपा का एक धड़ा पार्टी और संगठन के लिए काम कर रहा है, तो वहीं दूसरा धड़ा मौन है. यहां तक कि भाजपा जिलाध्यक्ष की भी अनदेखी की जा रही है. भाजपा की गुटबाजी ने कांग्रेस की गुटबाजी के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
