
राजगढ़। जिला चिकित्सालय में स्थित मुख्य स्टोर रुम मे शुक्रवार की दोपहर बाद एकाएक आग सुलग उठी, देखते ही देखते आग ने भयावह रुप ले लिया. आग में लाखों रुपये कीमती दवाईयां, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सामग्री जलकर नष्ट हो गई. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. भीषण आगजनी में हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है.
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में स्थित मुख्य स्टोर के पीछे वाले हिस्से में शाम करीब 4 बजे एकाएक धुआं उठते हुए देखा गया. जब तक मांजरा समझ आता आग भभक उठी. देखते ही देखते आग ने भयावह रुप ले लिया.
सवा घंटे तक उठती रही आग की लपटे जानकारी लगते ही राजगढ़ नगर पंचायत परिषद की दोनों दमकले मौके पर पहुंची तथा आग को बुझाने में जुट गई. आग बढ़ती ही जा रही थी. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. खिलचीपुर एवं ब्यावरा नपा की फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंची किंतु जब तक आग पर काबू पाया जा सका था.
जो आग से बचा वह पानी से हुआ खराब भयावह आग के कारण लाखों रुपये कीमत की दवाईयां जो कि स्टोर में रखी थी स्वाहा हो गई।
इधर,
बड़ी संख्या में कर्मचारी, नागरिक मौके पर जा पहुंचे तथा दमकलों के साथ ही आग बुझाने के कार्य में जुट गये.
जेसीबी से पुरानी शटर तोडक़र बुझाई आग स्टोर रुम में एक दीवार के यहां पुरानी बंद शटर को जेसीबी के द्वारा तोडक़र वहां से दमकल द्वारा पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया. आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आग बुझाने में सवा घंटे का समय लगा.
महज घटना या फिर कोई साजिश
राजगढ़ जिला चिकित्सालय के मुख्य स्टोर में लगी आग महज एक घटना है या फिर किसी साजिश का हिस्सा, यह भी एक जांच का विषय है. जिस जगह आग लगी वह कोई साधारण स्टोर नहीं बल्कि जिले भर की सरकारी दवाइयों का बफरिंग स्टॉक यहां रहता है. था-जहां लाखों रुपये की दवाइयां और उनसे जुड़ा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखा रहता है. आग ने न सिर्फ दवाइयों को राख कर दिया, बल्कि खरीद, भंडारण और वितरण से जुड़े सारे दस्तावेज भी नष्ट कर दिये.
दमकल की गाडिय़ां समय पर पहुंची और आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी अहम जगह पर सुरक्षा इंतजाम आखिर थे कहां.
क्या यह आग सिर्फ शॉर्ट सर्किट थी, या फिर शासकीय दवाइयों के स्टॉक और रिकॉर्ड में छिपे किसी बड़े घोटाले को मिटाने की कोशिश, क्योंकि जब आग सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं रहती और पूरा डिजिटल रिकॉर्ड ही खाक हो जाता है, तो शक होना स्वाभाविक है.
