बिना सुनवाई का अवसर दिये रिकवरी निकालने का आदेश निरस्त

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि सुनवाई का मौका दिए बिना अनियमित्ता की जांच कर याचिकाकर्ता कर्मी के खिलाफ रिकवरी निकाल दी। हाईकोर्ट ने उसे अनुचित पाकर निरस्त कर दी। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने कहा कि यदि अधिकारियों का इरादा वसूली का आदेश पारित करने का था, तो याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था।

इसलिए यह वसूली का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।यह मामला कटनी निवासी रामनारायण गर्ग की ओर से दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा व अमित रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सहायक आयुक्त सहकारिता ने याचिकाकर्ता के खिलाफ छह लाख 28 हजार रुपए की रिकवरी निकाल दी।

दरअसल याचिकाकर्ता प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति विजयराघवगढ़ में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। उसके खिलाफ अनियमित्ता की जांच की गई। दलील दी गई कि जांच के दौरान उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। सीधे जांच रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी निकाली दी गई। न्यायालय ने उक्त आदेश के साथ मामला वापस भेज दिया।

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