छतरपुर: जिला जेल में कैदियों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जेल परिसर के अंदर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल प्रशासन और विभाग में हलचल मच गई है। वीडियो में कैदियों के परिजनों से सामान भिजवाने, कैंटीन से खरीदारी और सुविधाएं देने के बदले पैसे वसूले जाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल डीआईजी अखिलेश तोमर ने देर शाम जिला जेल का निरीक्षण किया और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
क्या हैं वायरल वीडियो में आरोप
वायरल वीडियो में जेल कैंटीन पर तैनात महिला जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार पर आरोप लगाया गया है कि वह कैदियों से तय रकम लेकर सामान और सुविधाएं उपलब्ध कराती थीं। वीडियो में कथित तौर पर अलग-अलग कामों के लिए रेट तय होने, गुटखा-बीड़ी एमआरपी से महंगे दामों पर देने, नए कैदियों से सफाई कार्य न कराने के बदले हजारों रुपए लेने और पैसे न देने पर मारपीट कराने जैसे आरोप सुनाई दे रहे हैं। एक दृश्य में महिला प्रहरी पैसे लेकर बैग में रखती भी दिखाई देती हैं।
जेल प्रशासन का पक्ष
जेल अधीक्षक दिलीप सिंह जाटव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वायरल वीडियो 4 से 7 महीने पुराना है और गर्मियों के समय का है। उनके अनुसार, यह कैंटीन से जुड़ा मामला है, जिसमें कैदी तय सीमा तक राशि जमा कर सामान ले सकते हैं। पहले यह सीमा 1500 रुपए थी, जिसे अब बढ़ाकर 2000 रुपए कर दिया गया है। जेल प्रशासन का कहना है कि वीडियो में दिख रही रकम उसी व्यवस्था के तहत ली जा रही थी।
जांच जारी, निष्कर्ष बाकी
जेल विभाग का कहना है कि वीडियो की सत्यता, समय और आरोपों की पूरी जांच की जा रही है। महिला जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार को निलंबित कर सतना सेंट्रल जेल अटैच किया गया है। वसूली वैध थी या अवैध, वीडियो अब सामने क्यों आया और आरोप कितने सही हैं—इन सभी बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल मामले को लेकर छतरपुर जिला जेल सवालों के घेरे में है।
