नई दिल्ली। 25 दिसंबर, 2025। बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, जहाँ गैस की कमी और कोयला संयंत्रों के रखरखाव की समस्याओं ने घरेलू बिजली उत्पादन को पंगु बना दिया है। ऐसे में भारत से होने वाला बिजली आयात बांग्लादेश के लिए अस्तित्व का सवाल बन गया है। आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश की कुल बिजली आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी महज एक साल में 9.5% से बढ़कर 17% हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि बांग्लादेश में जलने वाला हर छठा बल्ब भारत की मदद से रोशन हो रहा है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट आती है, तो भारत के पास ‘पावर स्विच’ के रूप में एक बड़ा कूटनीतिक हथियार मौजूद है।
बांग्लादेश को बिजली निर्यात करने में भारत की निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अदाणी पावर की भूमिका सबसे अहम है। झारखंड के गोड्डा स्थित कोयला आधारित पावर प्लांट से प्रतिदिन लगभग 1500 मेगावाट बिजली सीधे बांग्लादेश भेजी जाती है। इसके अलावा, भारत सरकार की कंपनी एनटीपीसी (NTPC) 740 मेगावाट और पीटीसी इंडिया सहित अन्य कंपनियां भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। कुल मिलाकर, बांग्लादेश प्रतिदिन 2300 मेगावाट तक बिजली भारत से ले रहा है। यदि भारत सरकार का इशारा होता है, तो तकनीकी या समझौतों के आधार पर इस सप्लाई में कटौती बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को पूरी तरह ठप कर सकती है।
बांग्लादेश की भारत पर इतनी अधिक निर्भरता का मुख्य कारण उसकी प्राकृतिक गैस आधारित बिजली परियोजनाओं का विफल होना है। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) के अनुसार, गैस प्रेशर में कमी के कारण उनके कई प्लांट अपनी क्षमता का आधा उत्पादन भी नहीं कर पा रहे हैं। वैकल्पिक ईंधन के रूप में तेल का उपयोग बेहद महंगा साबित हो रहा है, जिससे भारत से बिजली खरीदना ही एकमात्र भरोसेमंद विकल्प बचा है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, भारत के खिलाफ किसी भी प्रकार की बयानबाजी बांग्लादेश के लिए आत्मघाती हो सकती है, क्योंकि उसकी ऊर्जा सुरक्षा की चाबी नई दिल्ली के हाथों में है।

