भोपाल: आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी और सोवा रिग्पा कॉलेजों की मान्यता और निरीक्षण से जुड़े कामों में अब सख्ती दिखाई देगी। भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग एनसीआईएसएम ने अधिकारियों से मुलाकात और कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। जिसके बाद मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड से जुड़े अधिकारियों से बिना पूर्व अनुमति और तय अपॉइंटमेंट के मुलाकात नहीं हो सकेगी।
यदि मुलाकात जरूरी है तो संबंधित कॉलेज के प्राचार्य की अनुमति के बाद एनसीआईएसएम से विधिवत अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य होगा। सूत्रों के अनुसार पहले बिना अपॉइंटमेंट के लोग आयोग के कार्यालय पहुंच जाते थे, जिससे कामकाज प्रभावित होता था। अब तय प्रक्रिया से ही मुलाकात होने पर न केवल आयोग का कार्य सुचारू होगा, बल्कि आयुष कॉलेजों की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद की जा रही है।
एनसीआईएसएम ने यह भी साफ कर दिया है कि अधिकारियों से मिलने के दौरान गुलदस्ता, उपहार या स्मृति चिन्ह जैसी कोई भी वस्तु भेंट नहीं की जा सकेगी। आगंतुकों को वैध सरकारी या संस्थागत पहचान पत्र साथ रखना होगा। यह प्रोटोकॉल आयोग के सचिव द्वारा जारी किया गया है। देशभर में 700 से अधिक आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें 1.5 लाख से अधिक छात्र, 25 हजार से ज्यादा शिक्षक और बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं। इन सभी को किसी न किसी कार्य के लिए एनसीआईएसएम कार्यालय जाना पड़ता है।नए नियमों से कॉलेज प्राचार्यों की जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही यह कदम व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
डॉ राकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन
