जबलपुर: पीडिता के द्वारा नाम व पहचान नहीं बताने तथा पुलिस के द्वारा शिनाख्त परेड करवाये बिना बलात्कार के आरोप में आरोपी बनाये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी।जस्टिस बी पी शर्मा ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने चालाकी से सप्लीमेंट्री बयान दर्ज किये है, जिससे याचिकाकर्ताओं को फंसाया जा सके। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता अमन राठौर तथा प्रिंस रजक की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि वह विगत पांच सालों से अधारताल थानान्तर्गत मून लाइट कैफे का संचालन कर रहे है। पीड़ित को उसके पति के दोस्त व मुख्य आरोपी मोहित पटेल उर्फ टिंकू मून लाइट कैफे में मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद मुख्य आरोपी ने पति की हत्या करने की धमकी देते हुए उसके साथ बलात्कार किया।
घटना की रिपोर्ट पीडिता ने अधारताल थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पीडिता के द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में सिर्फ मुख्य आरोपी मोहित का नाम लिखवाया था। इसके अलावा यह भी बताया था कि घटना के समय कैफे के काउंटर को एक व्यक्ति बैठा हुआ था। पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में उनके नाम व पहचान का उल्लेख नहीं किया है।
एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर में याचिकाकर्ता के नाम का उल्लेख नही किया गया था।
मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करवाये गये बयान में भी पीड़िता ने दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ तथ्यात्मक सबूत नहीं दिया थे। सिर्फ कहना कहा था कि घटना के समय एक व्यक्ति कैफे के काउंटर पर बैठा था। पुलिस ने जांच के दौरान कोई शिनाख्त परेड नहीं करवाई। ऐसा लगता है कि जांच अधिकारी ने चालाकी से सप्लीमेंट्री बयान दर्ज किये ताकि दोनों याचिकाकर्ताओं को फंसाया जा सके। रिकॉर्ड और पूरे सबूतों को देखने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाता है।
