
गुना। मध्यप्रदेश पुलिस में साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाले जांबाज अधिकारी सोम सिंह रघुवंशी अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से पूरे गुना जिले सहित पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। सोमवार को गुना के बूढ़े बालाजी स्थित श्रीराम मुक्तिधाम में गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सोम सिंह रघुवंशी के नाम वीरता का वह किस्सा दर्ज है, जो आज भी पुलिस जवानों के लिए प्रेरणा है। घटना 20 फरवरी 1982 की है, जब वे हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। उन्हें सूचना मिली कि विदिशा का खूंखार डाकू भगत सिंह, जिसने एक पूर्व विधायक की हत्या की थी और कई बड़ी डकैतियों में शामिल था, गुना जिले में छिपा हुआ है। मुठभेड़ के दौरान जब डकैत भगत सिंह ने अपनी 12 बोर की बंदूक से उन पर फायर किया, तब सोम सिंह अपनी जान की परवाह किए बिना सीधे डकैत से भिड़ गए। अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्होंने अकेले ही उस खतरनाक डकैत को दबोच लिया। उनकी इसी वीरता के लिए उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। सोम सिंह रघुवंशी न केवल एक साहसी पुलिस अधिकारी थे, बल्कि वे अपने मिलनसार और सहज व्यक्तित्व के लिए भी पहचाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक रूप से सक्रिय रहे। वे अपने पीछे दो पुत्र और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी अंतिम विदाई में शहर के गणमान्य नागरिक, पुलिस अधिकारी और परिजन शामिल हुए। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लोगों ने कहा कि सोम सिंह जी का निधन जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने सेवाकाल में साहस के जो आयाम स्थापित किए, वे हमेशा याद किए जाएंगे।
