मनरेगा का खत्म होना सबकी नैतिक नाकामी : सोनिया गांधी

नयी दिल्ली 22 दिसंबर (वार्ता) कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और दूसरे कानूनों में बदलावों के जरिए वह जनता के अधिकारों पर आधारित कानूनी ढांचे को खत्म कर रही है।
श्रीमती गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक में सोमवार को अपने लेख में सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा का कमजोर होना ‘सबकी नैतिक नाकामी’ है। इससे देश भर के करोड़ों लोगों को वित्तीय नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक कल्याण की पहल नहीं थी, बल्कि यह अधिकारों पर आधारित कार्यक्रम था जो गांव के परिवारों को रोजी-रोटी की सुरक्षा और सम्मान देता था। मनरेगा ने महात्मा गांधी के सभी के कल्याण के सपने को पूरा किया और काम करने का संवैधानिक अधिकार दिया था।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने सभी से एकजुट होने का आह्वान किया और कहा अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम एकजुट हों और उन अधिकारों की रक्षा करें जो हम सभी की रक्षा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई बुनियादी अधिकारों को एक-एक कर खत्म कर रही है। खेती क़ानूनों में सुधार का जिक्र करते हुए श्रीमती गांधी ने कहा कि कृषि से संबंधित तीन काले कानूनों के जरिए सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के अधिकार से वंचित करने की कोशिश थी। उन्होंने आगाह किया कि सरकार भविष्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को खत्म कर सकती है।

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