सतना : जिला चिकित्सालय के रक्त कोष में अवैध तौर पर रक्त बेचे जाने के आरोप पिछले कुछ वर्षों में कई बार सामने आ चुके हैं. इस मामले में रक्त कोष में पदस्थ कुछ कर्मचारियों और प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं. इसी कड़ी में एसडीएम सिटी ने भी स्टिंग करते हुए न सिर्फ खून की दलाली के रैकेट का पर्दाफाश किया बल्कि इस मामले में पुलिस ने 3 लोगों को रंगे हाथ दबोच भी लिया.
एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिय़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित चाय-पान, सब्जी-फल के ठेलों से खून की दलाली किए जाने की सूचना पिछले कुछ दिनों से प्राप्त हो रही थी. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गुरुवार को व्यूहरचना तैयार कर ली गई. दोपहर लगभग 1 बजे एसडीएम सिटी अस्पताल परिसर में मौजूद चौकी में पहुंच गए. जहां पर उन्होंने एक डमी व्यक्ति को अस्पताल भेजकर पर्ची बनवाई. जिसमें एक निर्धारित रक्त समूह के खून की आवश्यकता दिखाई गई. वह डमी व्यक्ति उस पर्ची को लेकर अस्पताल के गेट के सामने स्थित रजनीश साहू पिता शुभकरण निवासी जैतवारा के चाय के ठेले पर पहुंच गया.
डमी व्यक्ति ने चाय ठेला संचालक रजनीश को पर्ची दिखाते हुए खून की मांग की. जिसे देखकर रजनीश ने आश्वस्त करते हुए कहा कि खून मिल जाएगा लेकिल इसके लिए 4.5 हजार रु लगेंगे. यह सुनकर डमी व्यक्ति रुपए देने का राजी हो गया. लिहाजा रजनीश ने डोनर को बुलाने और सैंपल की बात कही. इसी बीच डमी व्यक्ति वापस अस्पताल के अंदर लौट गया. एसडीएम द्वारा दिए गए 4.5 हजार रु लेकी वह बाहर आया और चाय ठेला संचालक रजनीश को रुपए सौंप दिए. जिसे देखते ही पहले से तैयार कोतवाली पुलिस ने उसे दबोच लिया.
इसके फौरन बाद ही जब एसडीएम ने डमी व्यक्ति से पूछा कि खून का प्रबंध कराने की बात किसने कही थी तो निजी एंबुलेंस के कंडक्टर मौहम्मद कैफ का नाम सामने आया. लिहाजा उसे भी पकड़ लिया गया. इसके साथ ही जैसे ही एक अन्य व्यक्ति द्वारा खून की दलाली करने की बात करते हुए सुना गया तो उसे भी दबोच लिया गया. तीसरे व्यक्ति की पहचान अस्पताल परिसर की कैंटीन के कर्मचारी अनिल गुप्ता के तौर पर हुई. तीनों संदिग्धों को मौके से पकडऩे के बाद पूछताछ करते हुए इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जाने लगी.
अवांछित तत्वों की भरमार
जिला चिकित्सालय परिसर में एक ओर जहां उपचार कराने के लिए पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजनों की भीड़ मौजूद होती है. वहीं दूसरी ओर लगभग इसी अनुपात में अवांछित तत्व भी मंडराते रहते हैं जो जांच, उपचार से लेकर खून की दलाली में संलिप्त रहते हैं. अस्पताल के कर्मचारियों की मानें तो इस मामले में सबसे अधिक गंदगी निजी एंबुलेंस संचालकों और उनके स्टॉफ द्वारा फैलाई जाती है. गुरुवार को एसडीएम के स्टिंग में पकड़ा गया एक दलाल भी निजी एंबुलेंस कर्मी है. अस्पताल में मरीजों को बरगला कर निजी नर्सिंग होम ले जाना, अस्पताल के कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी देना और खुले आम खून की दलाली करने जैसे मामलों में कुछ निजी एंबुलेंस कर्मी जेल की हवा तक खा चुकेे हैं. लेकिन इसके बावजूद भी जिला अस्पताल में इनका दखल कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
इनका कहना है
खून की दलाली की शिकायत मिलने पर जिला चिकित्सालय क्षेत्र में स्टिंग करते हुए 3 लोगों को पकड़ा गया है. इस संबंध में तीनों से पूछताछ करते हुए यह जानकारी ली जा रही है कि इनका काम करने का तरीका क्या था, डोनर को कहां से बुलाया जाता था, इससे पहले और इस तरह से कितने लोगों को रक्त उपलब्ध कराया जा चुका है और साथ ही यह भी कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं. इसके अलावा यदि जांच में किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी.
राहुल सिलाडिय़ा, एसडीएम सिटी, सतना
