बड़वानी: जिले में इस वर्ष शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा गंभीर संकट में घिरती नजर आ रही है। 7 फरवरी से हासे और 11 फरवरी से हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ होनी हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले छात्रों की पढ़ाई अधूरी रह गई है। जिलेभर में हाई स्कूल के 11 हजार 156 और हासे के 8 हजार 560 छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं पर उनकी इस तैयारी पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य का गहरा असर पड़ा है।
निर्वाचन आयोग द्वारा कराई जा रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत जिले के 939 शिक्षकों को बीएलओ कार्य में लगा दिया गया। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के स्कूलों से हटकर प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त हो जाने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई। कई विद्यालयों में विषयवार कक्षाएं नियमित नहीं हो सकी, अनेक विषयों का सिलेबस अधूरा रह गया और बोर्ड परीक्षा से पहले जरूरी माने जाने वाला रिवीजन भी नहीं हो पाया।
परीक्षा में अब महज डेढ़ माह से भी कम समय शेष है, ऐसे में विद्यार्थियों के सामने समय की भारी कमी है। इस स्थिति का सीधा असर विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। छात्र-छात्राओं में तनाव, घबराहट और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 12वीं के विद्यार्थियों का कहना है कि अधिकांश विषयों का सिलेबस अभी तक 75 प्रतिशत से अधिक पूरा नहीं हो पाया है। बचे हुए पाठ्यक्रम को इतने कम समय में पूरा करना कठिन लग रहा है।
परीक्षा में बैठने की मजबूरी
हाई स्कूल के छात्रों ने बताया कि न तो समय पर रिवीजन कराया गया और न ही पूरा कोर्स पढ़ाया गया। करीब 70 प्रतिशत से अधिक सिलेबस के साथ परीक्षा में बैठने की मजबूरी है। छात्राओं की पीड़ा भी सामने आई है। 12वीं की छात्रा सुनीता का कहना है कि इस बार बोर्ड परीक्षा के परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहेंगे। पर्याप्त समय और मार्गदर्शन दोनों ही नहीं मिल पाए। हाई स्कूल की छात्रा सीमा बताती हैं कि स्कूल स्तर पर तैयारी अधूरी रही, मजबूरी में ट्यूशन का सहारा लेना पड़ा, लेकिन हर छात्र के लिए यह आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा खामियाजा
ये स्थिति शासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है। मतदाता सूची शुद्धिकरण जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया निस्संदेह जरूरी है, लेकिन विद्यार्थियों का भविष्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा के ठीक पहले शिक्षकों को बड़ी संख्या में गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। यदि समय रहते वैकल्पिक और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका सीधा खामियाजा हजारों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा।
निर्देश दिए गए हैं
कलेक्टर के निर्देश पर प्राथमिक स्तर के शिक्षकों को बीएलओ कार्य में प्राथमिकता दी गई है। आवश्यकता पडऩे पर ही 9वीं से 12वीं के शिक्षकों को लगाया गया। वार्षिक परीक्षाएं नजदीक होने के कारण शिक्षकों को एक्स्ट्रा कक्षाएं लगाकर सिलेबस पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जेएस परमार, सहायक संचालक जिला शिक्षा विभाग
