भोपाल। राज्य सरकार पर बढ़ते कर्ज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे नई दृष्टि से परिभाषित करते हुए कहा कि सरकार कर्ज को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य के विकास में किया गया निवेश मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित वित्तीय नियमों के तहत ही ऋण लिया जा रहा है और उसका मूलधन व ब्याज समयबद्ध रूप से चुकाया भी जा रहा है।
गुरुवार को वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया ऋण पूरी तरह पूंजीगत कार्यों, जैसे आधारभूत ढांचे, विकास परियोजनाओं और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों—में ही लगाया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने भी दोहराया कि कोविड काल के दो वर्षों को छोड़कर ऋण राशि का उपयोग राजस्व मद में नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि राज्य को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति है। वर्ष 2024-25 में जहां यह सीमा 45 हजार करोड़ रुपये थी, वहीं 2025-26 में जीएसडीपी के बढ़कर 16.94 लाख करोड़ होने से कर्ज सीमा लगभग 51 हजार करोड़ रुपये हो गई है। सरकार हर वर्ष करीब 28 से 29 हजार करोड़ रुपये मूलधन और ब्याज के रूप में चुका रही है।
राजस्व बढ़ाने के लिए मदिरा निर्यात को प्रोत्साहन देने, एकीकृत नीति लाने, मोबाइल ऐप से एक-दिवसीय लाइसेंस जारी करने और सभी विभागों के वर्क ऑर्डर व भुगतान की जानकारी के लिए केंद्रीकृत डेटा रिपोजिटरी बनाने की भी घोषणा की गई। उप मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राजस्व लक्ष्य समय से पहले हासिल किए जाएंगे और जनकल्याणकारी वादों को भी चरणबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा।
