छतरपुर। सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन छतरपुर जिले में कुछ शिक्षक इन प्रयासों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। शिक्षकों की लापरवाही का असर साफ तौर पर सरकारी स्कूलों में दिख रहा है, जहां न तो बच्चों को नियमित पढ़ाई मिल पा रही है और न ही सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो रहा है। ऐसा ही एक मामला राजनगर तहसील के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला देवगांव से सामने आया है।
यहां बच्चे रोज की तरह स्कूल पहुंचे, लेकिन स्कूल में तैनात शिक्षिका मौजूद नहीं थीं। बच्चे घंटों तक स्कूल के बाहर शिक्षक के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब कोई नहीं आया तो निराश होकर उन्हें घर लौटना पड़ा। शिक्षिका राधा रैकवार बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूल से अनुपस्थित रहीं, जिससे पूरे दिन की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। स्कूल में बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना के तहत भोजन भी तैयार किया गया था, लेकिन शिक्षक की गैरमौजूदगी में उसे वितरित करने वाला कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं था। मजबूरी में तैयार भोजन बच्चों को नहीं मिल सका और अंततः उसे जानवरों को खिलाना पड़ा। इस घटना ने मिड-डे मील जैसी महत्वाकांक्षी योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। गांव के कैलाश शर्मा ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति अक्सर बनी रहती है। उन्होंने शिक्षिका के स्थानांतरण और किसी दूसरे शिक्षक की नियुक्ति की मांग की है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया
मामले की जानकारी मिलते ही संकुल प्राचार्य आर.के. सोनी ने संबंधित शिक्षिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगने की बात कही है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने भी जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि इस लापरवाही पर शिक्षा विभाग कितनी सख्ती दिखाता है।
