बेलगावी, 18 दिसंबर (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नफरत फैलाने वाले भाषण और नफरत भरे अपराधों की रोकथाम विधेयक पारित होने का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यह कानून केंद्रीय कानूनों के विरोध में है और इसका दुरुपयोग नागरिकों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना सकता है।
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार को नफरत फैलाने वाले भाषण और नफरत भरे अपराधों की रोकथाम (हेट स्पीच और हेट क्राइम प्रिवेंशन) विधेयक 2025 पारित कर दिया। भाजपा ने इस विधेयक को नए अवतार में आपातकाल के समान बताया और सत्ता के संभावित दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सी एन अश्वथ नारायण ने कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों की घोर अवहेलना करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मंत्री ने एक क्षेत्र के खिलाफ बेहद असंवेदनशील बयान दिया था और जब भाजपा ने उनसे माफी की मांग की, तो सत्तापक्ष ने इस स्थिति का फायदा उठाकर बिना उचित चर्चा के इस विधेयक को पारित कर दिया।
श्री नारायण ने कहा कि कांग्रेस के मन में लोकतंत्र के लिए कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष ने चिंता जताई और जवाबदेही की मांग की, तो सरकार ने बिना किसी बहस के इतना विवादास्पद विधेयक पारित कर दिया जो संविधान और जनता के अधिकारों के प्रति पूर्ण संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही नफरत भरे भाषणों और अपराधों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त कानूनी तंत्र मौजूद हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यह नया विधेयक अपने वर्तमान स्वरूप में केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इसका दुरुपयोग नागरिकों में डर और भ्रम पैदा कर सकता है और प्रभावी रूप से यह कानून असहमति को दबाने तथा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कानूनी प्रावधानों में हेरफेर करने का जरिया बन सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से इस विधेयक में संशोधन करने का आह्वान किया ताकि इसे मौजूदा केंद्रीय कानूनों के अनुरूप बनाया जा सके और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
