भोपाल: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में माह का प्रादर्श के तहत पारंपरिक लोक खेल मीनाकार अली गुली माने का उद्घाटन किया गया। वीथी संकुल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कला संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़े लोगों की अच्छी उपस्थिति रही। उद्घाटन अवसर पर मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक संजय श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
उनके साथ पद्मश्री अनूप रंजन पांडे और पद्मश्री गोंड कलाकार भज्जू सिंह श्याम की उपस्थिति ने आयोजन को खास बना दिया। संग्रहालय निदेशक प्रो अमिताभ पांडे ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रादर्श की अवधारणा पर प्रकाश डाला। कार्यकम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दिसंबर माह के इस प्रदर्श का संयोजन संग्रहालय एसोसिएट राजेश गौतम ने किया है। उद्घाटन के बाद उन्होंने अतिथियों को प्रदर्शित खेल की जानकारी देते हुए उसका अवलोकन कराया।
मीनाकार अली गुली माने कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में खेला जाने वाला एक पारंपरिक गणनात्मक खेल है। लकड़ी से बने मछली के आकार के बोर्ड पर खेले जाने वाले इस खेल में रणनीति और गणना की अहम भूमिका होती है। यह खेल मनोरंजन के साथ मानसिक विकास और सामाजिक संवाद को भी बढ़ावा देता है। दर्शकों ने इस लोक खेल को भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक रोचक अनुभव बताया।
पारंपरिक खेल के विषय में जानें
मीनाकार अली गुली माने कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में खेला जाने वाला पारंपरिक खेल है। लकड़ी से बने मछली के आकार के बोर्ड पर यह खेल खेला जाता है। इसमें चौदह खाने होते हैं और बीज या गोटियों से गणना आधारित चालें चली जाती हैं। यह खेल मनोरंजन के साथ साथ मानसिक एकाग्रता और रणनीतिक सोच को बढ़ाता है। लोक मान्यताओं में इस खेल को प्राचीन काल से जोड़ा जाता है और कई क्षेत्रों में इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है। संग्रहालय में यह प्रादर्श दर्शकों को भारतीय लोक खेलों की समृद्ध परंपरा से परिचित करा रहा है
