बड़वानी: शहर में विकास कार्यों के तहत नगर पालिका द्वारा कई सार्वजनिक शौचालयों सुविधाघरों का निर्माण किया गया है, लेकिन उनकी बदहाल स्थिति और कई प्रमुख क्षेत्रों में शौचालयों की अनुपलब्धता के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर मुख्य बाजार, चौराहों और व्यस्त मार्गों पर सुविधाघर नहीं होने से महिलाओं को सबसे अधिक असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुछ साल पहले शहर में पुराने शौचालयों का जीर्णोद्धार कर उन्हें आधुनिक स्वरूप दिया गया। वहीं कई नए शौचालय भी बनाए गए। इसके बावजूद असामाजिक तत्वों द्वारा की गई तोडफ़ोड़ और नगर पालिका की लापरवाही ने इन सुविधाओं को बेकार बना दिया है। कारंजा चौक के पास बने शौचालय में मार्बल का पार्टिशन, हैंडवॉश बेसिन और नल टूटे हुए हैं। बस स्टैंड के पास स्थित शौचालयों की भी यही स्थिति है।
रिक्शा पार्किंग के पास बने पुरुष शौचालय के आसपास गंदगी फैली है और अंदर-बाहर यूरिन फैला होने से बदबू और मच्छरों का प्रकोप बना हुआ है। गंदगी की वजह से लोग शौचालय के अंदर जाने से कतराते हैं और मजबूरी में खुले में पैशाब करने को विवश हैं। इससे स्वच्छता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नगर पालिका द्वारा समय पर साफ-सफाई और मरम्मत नहीं किए जाने से आमजन में नाराजगी बढ़ रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा शर्मिंदगी और असुविधा झेलनी पड़ रही है।
महिला प्रसाधन की कमी
कचहरी रोड़ से रणजीत चौक तक के मुख्य बाजार क्षेत्र में महिला प्रसाधन की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। रणजीत चौक स्थित नाले के भीतर बने कम्युनिटी टॉयलेट की स्थिति भी गंदगी के कारण खराब है, जहां महिलाएं जाना पसंद नहीं करती। जानकारी के अभाव में कई महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। शुगर और अन्य बीमारियों से ग्रसित पुरुष और महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है। नई परिषद बने तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं हो पाई है।
तोड़ दिए है पुराने सुविधाघर
शहर में आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई सर्वेक्षण का अहम हिस्सा होती है, जबकि कई स्थानों पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शासकीय दूध डेयरी और दीनदयाल कॉम्प्लेक्स की बीच गली और सिर्वी मोहल्ला योगमाया मंदिर चौराहा स्थित पुराने शौचालय (सुविधाघर) तोड़ दिए गए हैं, लेकिन करीब एक साल बाद भी नए शौचालय नहीं बन पाए हैं, जिससे खुले में शौच की समस्या बढ़ रही है।
नए शौचालय के लिए कोई प्रस्ताव नहीं
शहर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आधुनिक शौचालयों का निर्माण किया है, लेकिन असामाजिक तत्वों ने हैंडवॉश बेसिन, टॉयलेट शीट और मार्बल पार्टिशन तोड़ दिए, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। जिससे आमजन को परेशानी हो रही है। महिलाओं के लिए जिला अस्पताल, झंडा चौक और मोटी माता चौक पर शौचालय उपलब्ध हैं। फिलहाल नए शौचालय निर्माण का प्रस्ताव नहीं है।
रामकरण डावर, नपा राजस्व निरीक्षक एवं स्वच्छता अभियान प्रभारी
