
जबलपुर। सहज और सौहार्दपूर्ण न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने प्रदेश में इस वर्ष चौथी व अंतिम नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। नेशनल लोक अदालत में 47 हजार से अधिक प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को निराकरण आपसी समझौते से किया गया। प्रकरणों में करोडो की अवार्ड भी पारित किये गये।
नेशनल लोक अदालत का आयोजन मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक जस्टिस संजीव सचदेवा के प्रेरणादायी नेतृत्व तथा जस्टिस न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष, के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में प्रदेशभर से उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
नेशनल लोक अदालत में सुनवाई के लिए प्रदेश में कुल 1435 पीठों का गठन किया गया था। उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जबलपुर एवं इंदौर तथा ग्वालियर खंडपीठों में सुनवाई के लिए 6 पीठ गठित की गई और 1429 पीठें का गठन जिला एवं तहसील न्यायालयों में किया गया। उच्च न्यायालय में आयोजित लोक अदालत की कार्यवाही की अध्यक्षता उच्च न्यायाधीशों द्वारा की गई, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में उच्च स्तरीय सहभागिता सुनिश्चित हो सकी।
लोक अदालत में विविध प्रकार के वादों को लिया गया, जिनमें रिट याचिकाएं, सिविल रिवीजन, द्वितीय अपीलें, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, वैवाहिक विवाद, अपराध शमनीय प्रकरण, धारा 138 एनआई एक्ट के अंतर्गत चेक बाउंस प्रकरण, श्रमिक विवाद, बैंक ऋण वसूली प्रकरण एवं विद्युत, जल बिल संबंधित विवाद शामिल थे। इन प्रकरणों की विविधता से लोक अदालत की समावेशी प्रकृति स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुई।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कुल 1,10,248 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों एवं 47,035 लंबित प्रकरणों का सौहार्दपूर्ण निपटारा किया गया। इन मामलों में समझौते के माध्यम से कई करोड़ रुपए के दावों का समाधान हुआ, जिससे यह सिद्ध होता है कि लोक अदालत मॉडल मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने एवं पक्षकारों के बीच आपसी सहमति को बढ़ावा देने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। हालांकि अंतिम आंकड़े अभी प्राप्त नहीं हुए हैं,
इस आयोजन की सफलता में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थों, बैंक एवं बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों तथा अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत सराहनीय रही। लोक अदालत के पूर्व जागरूकता अभियान के अंतर्गत कानूनी साक्षरता शिविरों, प्रचार-प्रसार कार्यक्रमों तथा डिजिटल माध्यमों से आम नागरिकों को सूचित एवं प्रेरित किया गया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में जस्टिस विवेक अग्रवाल, अध्यक्ष उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति एवं न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी, न्यायाधिपति म.प्र. उच्च न्यायालय द्वारा लोक अदालत का शुभारंभ किया गया।
इस गरिमामयी अवसर पर राधेलाल गुप्ता, अध्यक्ष, राज्य अधिवक्ता परिषद मध्य प्रदेश, विभिन्न बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण, धरमिंदर सिंह, रजिस्ट्रार जनरल, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं रजिस्ट्री के अधिकारी, उमेश पांडव, निदेशक, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी एवं अकादमी के अधिकार तथा कु. सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं प्राधिकरण के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
