एम्स्टर्डम, 11 दिसंबर (वार्ता) नीदरलैंड्स की अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन चेंजिंग मार्केट्स फाउंडेशन के हालिया अध्ययन के मुताबिक फैशन उद्योग में इस्तेमाल होने वाला कथित ‘हरित’ पुनर्चक्रित पॉलिस्टर नये पॉलिस्टर की तुलना में अधिक प्रदूषण फैला रहा है। संगठन द्वारा फैशन क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के उत्पादों पर किये गये अध्ययन में पाया गया कि पुनर्चक्रित पॉलिस्टर से बने कपड़ों और अन्य उत्पादों से नये पॉलिस्टर से बने उत्पादों की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक ‘माइक्रोप्लास्टिक’ पर्यावरण में मुक्त होते हैं। अध्ययन के अनुसार, इन उत्पादों की धुलाई के समय निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक सामान्य की तुलना में 20 प्रतिशत छोटे भी होते हैं, जो ज्यादा खतरनाक हैं।
उल्लेखनीय है कि कई बड़े ब्रांड पुनर्चक्रित पॉलिस्टर को पर्यावरण अनुकूल बताकर तेजी से इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। संगठन के अनुसार कई कंपनियाँ 2030 तक पुनर्चक्रित पॉलिस्टर के इस्तेमाल को 100 प्रतिशत तक करने की योजना बना रही हैं। गौरतलब है कि पर्यावरण विशेषज्ञ पर्यावरण में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक को लेकर लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं। ये पर्यावरण में हर जगह फैल चुके हैं और मानव खून में भी पाये जाने लगे हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गयी है। उल्लेखनीय है कि एक मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कणों को माइक्रोप्लास्टिक की श्रेणी में रखा जाता है। ये पाचन तंत्र से लेकर श्वसन तंत्र और फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

