इंदौर में मदद की बन रही मिसाल, अनिका के लिए शुरू हुए जनआंदोलन में शहर उठ खड़ा हुआ

इंदौर:दुर्लभ एसएमए टाइप-2 बीमारी से जूझ रही मासूम अनिका शर्मा के महंगे उपचार के लिए लगभग नौ करोड़ रुपए जुटाने की चुनौती ने शहर को एकजुट कर दिया है. एक पीड़ित परिवार की मदद को लेकर शुरू हुई पहल अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है. प्रशासन अपनी सीमाओं तक सहयोग कर चुका है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के बीच हालात बदले नहीं. ऐसे में आम नागरिक आगे आने लगे और यह सामाजिक मुहिम तेज़ी से फैलने लगी है. बताते हैं कि अभी तक दो करोड़ रुपए की राशि एकत्रित हो चुकी है.

इंदौर में गंभीर बीमारी से जूझ रहीं अनिका शर्मा की मदद के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अनीश पांडेय ने शहरव्यापी अभियान खड़ा कर दिया है. पांडेय ने बताया कि कई दिनों से लगातार मदद की अपील की जा रही थी, लेकिन अपेक्षाकृत कम जनप्रतिनिधि ही आगे आए. स्थिति को देखते हुए उन्होंने इसे जनआंदोलन का रूप देने का फैसला लिया है, ताकि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि किसी ज़रूरतमंद की तकलीफ अकेली उसकी नहीं होती.

अभियान के तहत उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात करवाकर उनकी ओर से पाँच लाख की सहायता का आश्वासन दिलवाया है. इसके अलावा विधायक गोलू शुक्ला द्वारा अपने अपने बेटे व बहू की ओर से अनिका शर्मा को पाँच लाख की मदद की घोषणा सार्वजनिक रूप से की गई है. वहीं इंदौर कलेक्टर शिवम् वर्मा द्वारा समय समय पर इस अभियान की जानकारी ली जाती है तथा यथासंभव मदद भी की जा रही है जिससे कि इस अभियान को ऊर्जा व गति मिल रही है. इसके अलावा अन्य नेताओं से भी सहयोग की मांग की गई है, ताकि उपचार के लिए जरूरी खर्च पूरा किया जा सके.

सोशल मीडिया पर भी अपील
पांडेय लगातार सोशल मीडिया पर शहर की जनता से बड़ी संख्या में आगे आने की अपील कर रहे हैं और आम लोगों का सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है. इस अभियान के तहत अब तक दो करोड़ से उपर की राशि जमा हो चुकी हैं, जो पर्याप्त नहीं है. शहर में इस मुहिम में कांग्रेस नेता बब्बू यादव ने भी खजराना गणेश मंदिर मोर्चा संभाल लिया, जहां श्रद्धालुओं को अनिका की स्थिति के बारे में बताया और सहयोग की अपील कर रहे है. मंदिर परिसर से हुई यह शुरुआत धीरे-धीरे कई इलाकों में फैल रही है. स्थानीय संगठनों, बाजार एसोसिएशनों और युवाओं के समूहों ने भी आगे बढ़कर मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे है.

युवाओं के समूह में आगे आ रहे
वहीं पांडेय का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जो सहयोग मिल सकता था वह दिया गया, लेकिन वास्तविक लड़ाई अभी जारी है. महंगे इलाज और लंबे उपचार के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में यह जनसहयोग ही अनिका को नई उम्मीद दे सकता है. उनका कहना है कि किसी एक की समस्या पूरे समाज की जिम्मेदारी है, और अगर शहर की जनता एकजुट हो जाए तो किसी भी परिवार को मजबूरी में अपनी बेटी का इलाज रोकना नहीं पड़ेगा. उन्होंने अपील की है कि इंदौर की पहचान सिर्फ विकास और स्वच्छता से नहीं, बल्कि अपनी इंसानियत से भी है, और यह वही समय है जब शहर को फिर साबित करना होगा कि वह किसी भी जरूरतमंद को अकेला नहीं छोड़ता.

यह हैं मामला
द्वारकापुरी, इंदौर की रहने वाली सारिका शर्मा (शानू) और उनके पति प्रवीण शर्मा की डेढ़ वर्षीय बेटी बेबी अनिका शर्मा एस.एम.ए. टाइप-2 नामक बेहद दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है. यह रोग दस से बारह लाख बच्चों में किसी एक को होता है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं धीरे धीरे नष्ट हो जाती हैं. बच्चे के हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं और वह बैठने या चलने जैसी सामान्य क्रियाएं भी नहीं कर पाता. देश में अब तक इसके केवल 17 केस ही दर्ज हुए हैं. अनिका की जान बचाने का एकमात्र उपचार अमेरिका से आने वाला ज़ोलजेन्स्मा नामक इंजेक्शन है, जिसकी कीमत करीब नौ करोड़ रुपए होती है. इतनी बड़ी राशि जुटा पाना परिवार के लिए बेहद कठिन है. इसी वजह से मां सारिका ने इंदौर की जनता से अपनी बेटी की मदद की गुहार लगाई है.

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