भोपाल। मप्र में पुलिसकर्मी अब वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ नहीं बन सकेंगे. डीजीपी कैलाश मकवाना ने इसको लेकर मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) जारी कर दिया है. जारी निर्देश का उल्लघंन करते पाए जाने पर ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच करते हुए निलंबन, वेतनवृद्धि रोकना, पदावनित या सेवा से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है. जारी एसओपी में यह भी बताया गया है कि यदि कृत्य में आपराधिक तत्व पाए जाते हैं, तो आपराधिक अभियोजन भी जलाया जाएगा.
मानक संचालन प्रक्रिया का उद्देश्य:-
i. पुलिस वर्दी की गरिमा, अनुशासन एवं संस्थागत मर्यादा बनाए रखना.
ii. पुलिस विभाग की सार्वजनिक छवि एवं जन-विश्वास की रक्षा करना.
iii. सोशल मीडिया के दुरुपयोग की रोकथाम करना.
iv. संवेदनशील, गोपनीय एवं आधिकारिक सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार को रोकना.
V. हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, पुलिस रूल्स, केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964 तथा अन्य लागू नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना.
इस प्रक्रिया में:
1. “सोशल मीडिया” से अभिप्राय फेसबुक, इंस्टाग्राम,एक्स, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से है.
ii. “गैर-आधिकारिक सामग्री” से आशय ऐसे फोटो/वीडियो/रील/स्टोरी/पोस्ट से है, जिसका पुलिस ड्यूटी या विभागीय कार्य से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो.
iii. “पुलिस वर्दी” में आधिकारिक वर्दी के साथ-साथ बैज, रैंक-चिन्ह एवं विभागीय पहचान चिह्न भी सम्मिलित होंगे.
