मानवाधिकार रक्षकों के साथ मजबूती से खड़ा है आयोग : एनएचआरसी अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 08 दिसंबर (वार्ता) मानवाधिकार रक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने सोमवार को देश और दुनिया के सभी मानवाधिकार रक्षकों को संबोधित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 9 दिसंबर 1998 को मानवाधिकार रक्षकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़े जिस घोषणापत्र को अपनाया था, वह मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह घोषणापत्र सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा की 50वीं वर्षगांठ पर पारित किया गया था।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि आयोग मानवाधिकार रक्षकों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता तथा कार्य करने के अधिकार को सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि आयोग यह सुनिश्चित करता है कि रक्षक बिना किसी डर, दबाव या भेदभाव के अपनी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर 2025 को एनएचआरसी ने अपना 32वां स्थापना दिवस मनाया, जिसमें विशेष रूप से महिला मानवाधिकार रक्षकों के काम को बढ़ावा देने और समर्थन देने पर जोर दिया गया। आयोग ने उनके लिए विशेष ईमेल-आईडी, फोकल प्वाइंट, वार्षिक रिपोर्ट में अलग अध्याय तथा विभिन्न मंचों पर संवाद जैसी व्यवस्थाएं बनाई हैं, जिससे कमजोर वर्गों की आवाज़ को मजबूत करने में मदद मिली है।

हाल ही में एनएचआरसी ने भुवनेश्वर (ओडिशा) और हैदराबाद (तेलंगाना) में खुली सुनवाई और शिविर बैठकों में मानवाधिकार रक्षकों, नागरिक समाज और शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत की। इन चर्चाओं को संबंधित राज्य सरकारों के साथ साझा किया गया, जिन्होंने मानवाधिकार रक्षकों के कार्य में सहयोग का आश्वासन दिया।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि मानवाधिकार रक्षकों के प्रयास न्याय, समानता और स्वतंत्रता की जड़ों को मजबूत करते हैं। चुनौतियों के बावजूद उनका समर्पण ही कमजोर और हाशिए पर रह रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है।

 

 

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