सिंगरौली : जिले के विकास खण्ड देवसर के जन शिक्षा केन्द्र गन्नई के शासकीय प्राथमिक शाला टोपा टोला-कुकरांव विद्यालय के निरीक्षण में यह राज तो खुला और अधिकारियों ने माना कि एक कमरे में विद्यालय चल रहा है। लेकिन अधिकारियों ने यह जिक्र नही किया कि इस विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था बदहाल है।
इधर बता दें कि जिले में कई ऐसी विद्यालय शासकीय हैं जो कि देख-रेख के अभाव में जीर्णशीर्ण हालत में होती जा रही है। जबकि इधर सूत्र दावा करते हैं कि डीएमएफ फण्ड से विद्यालयों के रख-रखाव और रंग-रोगन के लिए कई करोड़ रूपये स्वीकृत हुआ था।
जहां विद्यालय नही है, वहां विद्यालय बनाया जाये, जिन विद्यालयों की हालत खराब है, उनका मरम्मत कराया जाये। लेकिन करोड़ों रूपये किसके खजाने में गये और किस-किस ने इसका स्वाद चखा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि जबकि टोपा टोलाविद्यालय की बदहाल व्यवस्था को प्रमुखता के प्रकाशित किया गया तो अधिकारियों की नींद खुली और आनन-फानन में निरीक्षण के लिए भेजा गया। जहां अधिकारियों ने निरीक्षण किया और माना कि विद्यालय में कमी है। अगर बीआरसी विद्यालयों का निरीक्षण करते तो शायद इस तरह के हालात सामने न आते और व्यवस्था सुधरती।
गुणवत्ता युक्त मिल रहा भोजन: डीपीसी
डीपीसी आरएल शुक्ला ने बताया कि शासकीय प्राथमिक विद्यालय टोपा टोला के संबंध में सोशल मीडिया के माध्यम से खबर चलाई जा रही है कि प्राथमिक विद्यालय टोपा टोला में बच्चों को मीनू के आधार पर गुणवत्ता युक्त मध्यान्ह भोजन नहीं दिया जा रहा है। विद्यालय के कमरे जर्जर हालत में है, बच्चे बाहर बैठ के पढ़ रहे हैं। खबर संज्ञान में आते ही बीआरसी द्वारा जांच कराया गया। जांच प्रतिवेदन एवं पंचनामा में यह उल्लेख किया गया है, विद्यालय में गुणवत्ता युक्त दाल-चावल व सब्जी मध्यान्ह भोजन में दी जा रही है। विद्यालय में मात्र 16 बच्चे ही अध्ययनरत है। एक कमरा सही स्थिति में है, जिससे पंचायत के द्वारा निर्मित कराया गया है, इसमें बच्चे पढ़ते हैं। जिन कमरों की स्थिति जर्जर है, वहां कक्षा संचालित नहीं की जाती है। ठंड के मौसम की वजह से शिक्षिका द्वारा बच्चों को बाहर पढ़ाया जा रहा था।
