खरीदी केन्द्रो में अव्यवस्था के बीच धान की खरीदी

रीवा: तमाम अव्यवस्थाओ के बीच धान उपार्जन का काम खरीदी केन्द्रो में चल रहा है. जहा किसानो के लिये छाया और पानी की व्यवस्था नही की गई है. वही तौल में भी गड़बड़ी की जा रही है. गत वर्ष की तरह इस बार भी खरीदी केन्द्रो में भर्रेशाही है कोई सुधार नही हुआ.किसानों ने बताया कि पुराने बारदानों में 40 किलो धान की तौल तो आसानी से हो जाती है, लेकिन बारदाना फटने लगता है और उसकी सिलाई नहीं हो पाती.

जिससे धान बाहर निकलने लगती है. यह स्थिति खरीदी केंद्रों पर काम को धीमा करती है और किसानों की लंबी लाइनें लग जाती हैं. नए बारदानों की क्षमता को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. किसान बताते हैं कि नए बारदानों में 40 किलो धान का वजन ही नहीं आता. बारदाना छोटा होने के कारण 37 से 38 किलो में ही बोरी भर जाती है. सरकार ने गोदाम स्तर पर ‘वाहर तौलाई’ अनिवार्य की है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि अधिकांश गोदामों में वाहर तौलाई के लिए निर्धारित स्थान ही उपलब्ध नहीं है. वाहर रोड तो है, पर गोदाम परिसर में उचित जगह का अभाव है. नतीजतन तौल बाहर सडक़ पर करनी पड़ती है, जिससे खरीदी की गति बाधित होती है और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ते हैं. गोदामों में स्थानाभाव, बारदाना समस्याएं, वाहर तौल की बाध्यता, और सेवा शुल्क विवाद… ये सभी मुद्दे खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुचारू संचालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं.

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