छतरपुर। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान सूरज नामक युवक की मौत के बाद परिजनों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, वे रात लगभग 1:30 बजे सूरज को चौथी मंजिल पर भर्ती करवाकर पहुंचे थे, उस समय उसकी हालत सामान्य थी। लेकिन तीन घंटे तक नर्सों ने ही उपचार किया और बार-बार कहने पर भी ड्यूटी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि सूरज की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई, लेकिन डॉक्टर को न बुलाया गया और न ही समय पर किसी विशेषज्ञ को तैनात किया गया। सुबह करीब 4:30 बजे हालत गंभीर होने लगी, फिर भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और न ही उसे अन्य अस्पताल रेफर किया गया।
सुबह 5:30 बजे डॉक्टर पहुंचे और उन्होंने सूरज को मृत घोषित किया। परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर डॉक्टर आते तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में रात के समय डॉक्टरों का अक्सर कॉल ड्यूटी पर न पहुंचना आम बात है। इस मामले में सिविल सर्जन शरद चौरसिया का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
