
सिंगरौली। विकासखंड देवसर अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र गन्नई की शासकीय प्राथमिक शाला टोपा टोला कुकरावं में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे पिछले कई महीनों से खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
स्कूल की इमारत पिछले करीब पांच वर्षों से जर्जर अवस्था में है। भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और कई स्थानों पर सरिया बाहर दिखाई दे रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि कभी भी छत गिरने की आशंका बनी रहती है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कक्षाएं भवन के बाहर संचालित की जा रही हैं, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान बनकर रह गया है। स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। पीने के पानी के लिए लगे हैंडपंप से जंग मिला दूषित पानी निकलता है, जिसे पीने के लिए बच्चे मजबूर हैं। नल-जल योजना के तहत किया गया कनेक्शन वर्ष 2024 से बंद पड़ा है, लेकिन अब तक उसे चालू कराने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं मध्यान्ह भोजन भी सही ढंग से संचालित नहीं हो रही है। निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन न देकर रोजाना बच्चों को केवल दाल, चावल और सब्जी दी जा रही है। अव्यवस्था और असुरक्षित माहौल से चिंतित अभिभावक अब बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की जान उससे भी ज्यादा कीमती है। जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण कर केवल आश्वासन देकर लौट जाते हैं, जबकि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। देवसर बीआरसीसी धनराज सिंह का कहना है कि स्कूल के नए भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब मौजूदा भवन किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। यह हालात शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। न सुरक्षित भवन, न शुद्ध पेयजल और न समुचित व्यवस्था, ऐसे में क्या ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का भविष्य इसी तरह असुरक्षा के साए में पनपेगा। यह तस्वीरें शिक्षा प्रणाली की विफलता को साफ उजागर करती है। इधर बता दें कि इस विद्यालय के हालात पर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अभी तक असफल प्रयास कर रहे हैं। अगर यही हालात रहें तो विद्यालय भवन कब जवाब दे और कोई हादसा हो जाए, कौन जिम्मेदार होगा।
