इंदौर:सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान इंदौर पुलिस की बड़ी कारस्तानी उजागर हुई है. शहर के चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल पर आरोप है कि उनके द्वारा फर्जी गवाह बनाकर लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे थे. चंदन नगर थाने में 160 से ज्यादा ऐसी एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिनमें अधिकांश मामलों में बार-बार केवल दो गवाहों के ही नाम हैं. यह खुलासा चंदन नगर निवासी अनवर हुसैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान हुआ.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता एडवोकेट असद वारसी ने सबूतों के साथ याचिका लगाई थी. इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट भी हैरान रह गया. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने टीआई इंद्रमणि पटेल को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा- तुम दुर्भाग्य से उस कुर्सी पर बैठे हो, तुम्हें वहां नहीं होना चाहिए. यह हमारी आत्मा की पीड़ा है. कोर्ट की टिप्पणी के दौरान टीआई पटेल चुपचाप सुनते रहे. मामले में एडवोकेट असद वारसी ने जो सबूत प्रस्तुत किए, उसे देखने के बाद अदालत सन्न रह गई.
मामले ने पुलिस की छवि को पहुंचाया गंभीर नुकसान
इस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया कि पिछले एक साल में चंदन नगर पुलिस ने 160 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें अधिकांश मामलों में केवल दो गवाह अमीर रंगरेज और सलमान कुरैशी का बार-बार उपयोग किया गया. इन दोनों को अलग-अलग मामलों में आगे-पीछे करके गवाह बनाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था का खुला खिलवाड़ बताया और कहा कि थाना प्रभारी पॉकेट गवाहों का इस्तेमाल कर निर्दोष लोगों के साथ अन्याय कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए टीआई इंद्रमणि पटेल को 9 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है. इस मामले ने इंदौर पुलिस की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है.
यह होते हैं पॉकेट गवाह?
याचिकाकर्ता एडवोकेट असद वारसी के अनुसार, पॉकेट गवाह वह होते हैं, जिन्हें पुलिस अपने केस को मजबूत दिखाने, अपराध के आंकड़े बढ़ाने और विभागीय टारगेट पूरा करने के लिए इस्तेमाल करती है. असली गवाह न मिलने पर ऐसे गवाहों को बदल-बदलकर पेश किया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरण न्याय व्यवस्था और पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हैं
